मुख्य चुनाव अधिकारी प्रो. रवीश कुमार यादव ने चुनाव की अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि 23 अप्रैल को सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक शिक्षक संघ चुनाव के लिए नामांकन किए जाएंगे। 24 अप्रैल को सुबह 11 से दोपहर दो बजे तक नामांकनपत्रों की जांच होगी और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 26 अप्रैल को सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक मतदान होगा।
दोपहर तीन बजे से मतों की गिनती की जाएगी। इसके बाद उसी दिन चुनाव परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी कार्यों के लिए स्थल गणित विभाग रहेगा। महाविद्यालय के शिक्षकों की प्राचार्य द्वारा उपलब्ध करवाई गई सूची ही वोट देने के लिए अंतिम और सर्वमान्य होगी।
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भ्रामक तथ्यों पर अनुमति लेने का आरोप
वहीं दूसरी ओर प्राचार्य प्रो. एसएस रावत ने निवर्तमान शिक्षक संघ के पदाधिकारियों द्वारा 22 अप्रैल को प्रस्तावित आम सभा की अनुमति को निरस्त कर दिया है। उनके द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार शिक्षकों द्वारा प्रमाणों के साथ प्रस्तुत की गई आपत्तियों, शिक्षक संघ के चुनाव अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रमाणपत्रों, रुहेलखंड विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (रूटा) और उप्र विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुफुक्टा) के द्वारा दी गई प्रमाणित आख्या से स्पष्ट है कि महाविद्यालय की शिक्षक संघ की कार्यकारिणी कालातीत हो चुकी है। ऐसे में उसे शिक्षक संघ के तत्वाधान में किसी प्रकार का निर्णय लेने का न तो विधि सम्मत अधिकार है और न ही यह लोकतांत्रिक व नैतिक दृष्टि से उचित है। ऐसे में भ्रामक तथ्यों के आधार पर निवर्तमान शिक्षक संघ के पदाधिकारियों द्वारा प्राप्त की गई 22 अप्रैल की आम सभा की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।
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प्रक्रिया असंवैधानिक, प्राचार्य निष्पक्ष नहीं
निर्वतमान अध्यक्ष प्रो. रमाकांत ठाकुर ने कहा कि चुनाव कराने का दायित्व निवर्तमान शिक्षक संघ को होता है। अगला शिक्षक संघ नहीं बन जाता, तब तक वह कार्यकारी बना रहता है। फुफुक्टा का हमारे पक्ष में पत्र आया है। उसमें 11 मई तक ही शिक्षक संघ का कार्यकाल माना गया है। 22 अप्रैल को प्रस्तावित आम सभा को प्राचार्य ने निरस्त कर दिया है। यह अलोकतांत्रिक तरीके से चुनाव करवाया जा रहा है। 22 शिक्षक मिलकर चुनाव करवा रहे हैं। तीन चुनाव अधिकारियों के होते हुए एक चुनाव अधिकारी के हस्ताक्षर से चुनाव घोषित किया गया है। चुनाव के लिए नामांकन की फीस भी स्पष्ट नहीं की है। प्राचार्य ने एकपक्षीय कार्य किया है। उनकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। अब मेरा व्यक्तिगत निर्णय है कि मैं चुनाव नहीं लडूंगा।
- सोमवार को चुनाव अधिकारियों की बैठक थी। कई बार तीनों चुनाव अधिकारी एक साथ उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। इसलिए मुख्य चुनाव अधिकारी के रूप में प्रो. रवीश कुमार यादव अधिकृत कर दिया है। उनके हस्ताक्षर पूरी टीम के माने जाएंगे। 97 शिक्षक इस प्रक्रिया में प्रतिभाग करेंगे। हम संवैधानिक तरीके से चुनाव करवा रहे हैं।
प्रो. आशुतोष सक्सेना, चुनाव अधिकारी