मुरादाबाद। बढ़ते दामों की वजह से सब्जियों आम लोगों के किचन से दूर हो रही हैं। कुछ लोग तो सब्जियों की जगह चने और छोले से काम चला रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि मंडी में सब्जी की आवक कम है। वजह यह है कि मंडी से निकल कर कॉलोनियों तक पहुंचते ही सब्जियों के दाम दोगुने हो जाते हैं। सब्जी विक्रेता इसकी वजह स्थानीय स्तर पर सब्जियों की कम पैदावार और मालभाड़े में बढ़ोतरी को बताते हैं। वहीं, रमजान में मांग बढ़ने से भी फलों, आलू, अरबी, लौकी, पालक आदि सब्जियों के दाम बढ़ गए थे, लेकिन अब जबकि मंडी में स्थानीय और बाहरी दोनों सब्जियां पहुंचने लगी हैं, इसके बाद भी आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ कम नहीं हो रहा है। किसानों का कहना हैं कि उनको फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। किसान के हाथ केवल निराशा ही आ रही है। मंडी से निकलने के बाद कॉलोनियों में फुटकर विक्रेता दो गुना ज्यादा रेटों पर सब्जियां बेच रहे हैं। ऐसे में गर्मी के समय में राहत देने वाली हरी सब्जियां लोगों की बजट से बाहर होती जा रही हैं।