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Moradabad News: पिता के सपनों को बनाया अपनी जिद, अब यूपी की टीम में चमकेंगे सिद्धार्थ

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मुरादाबाद। कभी एक बल्ला और पुरानी गेंद लेकर मोहल्ले की गली में खेल शुरू किया था। न बड़ी अकादमी, न महंगी किट, बस सपनों का भार और पिता के भरोसे की छांव। यहीं से शुरू हुआ सिद्धार्थ चौधरी का संघर्ष अब उन्हें उत्तर प्रदेश की अंडर-23 टीम तक ले आया है। यह सफर सिर्फ क्रिकेट का नहीं बल्कि जिद, जुनून और उम्मीदों के न हार मानने की कहानी है।
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वेव ग्रींस कॉलोनी में रहने वाले दाहिने हाथ के सलामी बल्लेबाज सिद्धार्थ चौधरी की सफलता में सबसे बड़ा हाथ उनके पिता विनय कुमार चौधरी का है। वह कहते हैं कि जब सबने कहा कि खेल से कुछ नहीं होगा तब मैंने बेटे से कहा कि मैदान मत छोड़ना। पिता के इन शब्दों ने सिद्धार्थ के अंदर वह आग भर दी जो आज भी हर सुबह उनकी दौड़, हर स्ट्रोक और हर दिन के आठ घंटे के अभ्यास में झलकती है।
सिद्धार्थ ने क्रिकेट की शुरुआत साल 2013 में सोनकपुर स्टेडियम से की थी। तब वह सिर्फ दस साल के थे। शुरुआत में पिता के साथ घर के पास खेलने वाले सिद्धार्थ के खेल ने धीरे-धीरे आकार लेना शुरू किया। उनकी लगन देख पिता ने उन्हें कोचिंग में दाखिला दिलाया। सिद्धार्थ बताते हैं कि पिता रोज उन्हें खुद स्टेडियम छोड़ते थे और कई बार इंतजार करते रहते थे।
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सिद्धार्थ की क्रिकेट यात्रा आसान नहीं रही। 2017-18 में उन्होंने यूपी की अंडर-14 टीम में जगह बनाई और शानदार प्रदर्शन करते हुए बेस्ट बैट्समैन का खिताब जीता। लेकिन इसके अगले ही साल अंडर-16 टीम में जगह मिलने के बावजूद उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला। वह कहते हैं कि मैंने तब सोचा था शायद मेरा सफर यहीं खत्म हो गया है। उन्होंने खेल छोड़ने का मन बना लिया था। पर पिता ने हारने नहीं दिया। पिता के समर्थन के बाद सिद्धार्थ ने अपने अंदर की आग को दोबारा जगा लिया।

2021-22 में सिद्धार्थ यूपी की अंडर-25 टीम के लिए स्टैंडबाई में चुने गए थे। इस चयन ने उनके आत्मविश्वास को फिर से जगा दिया। 2023-24 में जब यूपी टी-20 लीग का पहला संस्करण खेला गया तो सिद्धार्थ को काशी रुद्रास टीम में जगह मिली। टीम ने टूर्नामेंट जीता और सिद्धार्थ ने बल्ले से अहम योगदान दिया।
हाल ही में 13 अक्तूबर को जब यूपी की अंडर-23 टीम घोषित हुई तो सिद्धार्थ को एक बार फिर स्टैंडबाई में रखा गया। लेकिन किस्मत ने फिर पलटी मारी और तीसरे मैच के लिए उन्हें सीके नायडू ट्रॉफी में खेलने का मौका मिल गया। नोएडा में जारी इस टूर्नामेंट में वह यूपी की टीम की ओर से तीसरा मैच खेलते हुए नजर आंएगे।
सिद्धार्थ मौजूदा समय में एमपीएस क्रिकेट अकादमी में दानिश मिर्जा और सलीम खां से प्रशिक्षण लेते हैं। दानिश ने कहा कि सिद्धार्थ के अंदर रन की भूख है जिसकी वजह से वह लगातार बेहतर होते जा रहे हैं। इसके साथ ही सिद्धार्थ यूथ क्रिकेट अकादमी में कोच प्रदीप टंडन के साथ भी अभ्यास करते हैं। सुबह से शाम तक करीब आठ घंटे का अभ्यास उनके दिन का हिस्सा है। सिद्धार्थ के कारोबारी पिता विनय चौधरी और मां अमिता चौधरी (गृहणी) ने कहा कि यह सिर्फ बेटे की सफलता नहीं बल्कि एक सपने की जीत है। वह हमेशा अपने बेटे को पूरा सपोर्ट करते हैं जिससे वह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
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- रणजी और नीली जर्सी है लक्ष्य
सिद्धार्थ का अगला लक्ष्य रणजी ट्रॉफी टीम में जगह बनाना है और आगे चलकर भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल होना है। उनका कहना है कि उनके लिए विराट कोहली सिर्फ खिलाड़ी नहीं प्रेरणा हैं। वह विराट की तरह खेलना नहीं बल्कि उनकी तरह मेहनत करना चाहते हैं।
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- बुद्धि विहार में बना रखा है अलग सेट
सिद्धार्थ ने अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए बुद्धि विहार में एक छत पर खुद ही नेट लगवा रखा है जहां वह नियमित रूप से गेंदबाजी व बल्लेबाजी का अभ्यास करते हैं। यह सब वह अपने दैनिक अभ्यास से अलग हटकर करते हैं जो उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
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