शनिवार सुबह आठ बजे मंडी समिति के भीतर मतगणना शुरू हुई तो अंदर सपा दिग्गजों के साथ ही बाहर मौजूद उनके समर्थक भी खासे उत्साहित थे। इनके चेहरों पर जीत का यकीन था। लेकिन जैसे - जैसे काउंटिंग आगे बढ़े इनका यकीन उम्मीद में सिमटता चला गया और फिर नतीजे साफ होते - होते इनके चेहरों पर मायूसी छा गई।
चुनाव हारने वालों का गम अपनी सीट गंवाने तक सिमटा था लेकिन सपा समर्थकों को अखिलेश की बड़ी हार का दर्द रुला गया। यूं तो छह में चार सीटें सपा जीत गई लेकिन अखिलेश की शिकस्त के गम ने इनकी जीत की खुशी समेट दी।
शनिवार को तड़के से ही प्रत्याशियों के समर्थकों ने मंडी समिति के आसपास अपने तंबू शामियाने लगाकर जश्न की तैयारियां शुरू कर दी थीं। सभी को उम्मीद थी कि जीत का सेहरा उन्हीं के सिर बंधेगा। फूल मालाएं खरीद ली गईं और कार्यकर्ताओं व समर्थकों की नजरें सीधे काउंटिंग पर जा टिकीं।
प्रत्याशी भी पूरे आत्मविश्वास से लवरेज होकर मंडी समिति में दाखिल हुए। लेकिन छह को छोड़ हंसते हुए आए प्रत्याशियों में उदास चेहरों के साथ काउंटिंग से लौटना पड़ा। भाजपा प्रत्याशियों को फिर भी इस बात का सुकून रहा कि सूबे में प्रचंड बहुमत से उनकी पार्टी की सरकार बन रही है।
लेकिन सपा के अनीसुर्रहमान और हाजी यूसुफ अंसारी से विधायकी छिनी तो इनके चेहरे उतर गए। जीत दर्ज कराने वाले बाकी चार सपा विधायकों हाजी इकराम कुरैशी, मोहम्मद फहीम, नवाबजान खां और हाजी रिजवान के चेहरों से भी खुशी गायब थी। सूबे में सपा की इतनी बड़ी शिकस्त ने सभी को हिला दिया है।