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Moradabad News: बंदूक के दुकानदार कर रहे कपड़े का कारोबार

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मुरादाबाद। शहर में लाइसेंसी असलहे बेचने की दुकानें तेजी से बंद हो रही हैं। कुछ साल पहले शहर में 55 दुकानें थीं, लेकिन अब मात्र 17 बची हैं। इनमें भी अधिकांश ऐसी हैं, जिन्हें छोटा कर बाकी हिस्से में दुकानदारों ने दूसरा व्यापार शुरू कर दिया है। नए शस्त्र लाइसेंस जारी न होने के कारण दुकानों पर ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे दुकानदारों का खर्च भी नहीं निकल पाता है। दुकानें बंद होने पर किसी ने कपड़े की दुकान खोल ली तो कोई सराफा कारोबार कर रहा है।
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नेता, व्यापारी, कारोबारी और जनप्रतिनिधि हथियार रखना अपना स्टेटस मानते हैं। वह पहले आत्मरक्षा का हवाला देकर लाइसेंस जारी करा लेते थे। कुछ दिन में ही फाइल तैयार हो जाती थी। इसके बाद वह दुकानों से जाकर असलहे खरीद लेते थे। इसके चलते दुकानों पर भी खूब ग्राहक पहुंचते थे। असलहों के साथ कारतूस भी खूब खरीदते थे, लेकिन अब असलहे के साथ ही कारतूस बिक्री के लिए भी नियम कड़े हो गए हैं।

लाइसेंसी शस्त्रधारक कारतूस तक नहीं खरीद रहे हैं। जिसका सीधा असर कारोबार पर पड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में शहर में 38 दुकानें बंद हो गई हैं। जो व्यापारी दुकानें चला रहे हैं। वह भी परेशान हैं। उनका कहना है कि दुकान का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया है। कई-कई दिन तक कोई ग्राहक दुकान पर नहीं पहुंचता।
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दुकानदारों का कहना है कि जो लोग कारतूस खरीदने आ रहे हैं वह भी परेशान हैं। उनका कहना है कि एक-एक कारतूस का हिसाब रखना पड़ता है और लंबी प्रक्रिया के बाद कारतूस खरीदने की अनुमति मिल पाती है। कई व्यापारी ऐसे हैं, जिन्होंने दुकानों को बंद कर दूसरे कारोबार शुरू कर दिए। किसी ने एक्सपोर्ट का काम शुरू कर दिया तो कोई सोने-चांदी के जेवर बेचने लगा। किसी ने कपड़े की दुकान खोल ली है। कुछ अन्य दुकानदार भी दुकानों को सरेंडर कर दूसरे कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

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हमारी दुकान 1932 में खुली थी। तीन पीढि़या लाइसेंसी हथियार बेचती आ रही हैं, लेकिन अब कारोबार घटकर आधा भी नहीं बचा है। दुकान का खर्चा निकालना भी मुश्किल हो गया है। अपनी दुकान में कारोबार कर रहे हैं। इसलिए झेल पा रहे हैं। अगर दुकान किराये की होती तो कारोबार करना मुश्किल हो जाता। नए नियम बनने से कारोबार पर असर पड़ा है। - इकबाल, इकबाल गन हाउस



शहर की कई दुकानें पहले ही बंद हो चुकी हैं। हमारी दुकान का कारोबार भी बहुत घट गया है। कई सालों से दुकान का खर्चा नहीं निकल पा रहा था। मैंने तो कई साल पहले ही सोच लिया था कि इस कारोबार का भविष्य नहीं बचा है। इसलिए मैंने पढ़ाई की और प्रोफेसर बन गया। ग्रेटर नोएडा के एक कॉलेज में प्रोफेसर हूं। मेरा छोटा भाई ही दुकान चला रहा है, लेकिन इसी तरह कारोबार घटता रहा तो दुकान बंद करनी पड़ेगी। - डॉ. अंबुज कुमार, प्रभात गन हाउस


जिले में 18 हजार से ज्यादा लाइसेंसी असलहे
जनपद में 18,727 लाइसेंसी असलहे हैं। जिसमें बंदूक, पिस्टल, रायफल समेत अन्य असलहे हैं। पांच हजार से ज्यादा हथियार महिलाओं के नाम पर जारी हैं। इसके अलावा सैकड़ों फाइल कलक्ट्रेट में असलहा दफ्तर में पड़ी हैं। जिन पर लाइसेंस जारी नहीं नहीं हो पा रहे हैं। जिन लोगों ने त्योहार, चुनाव के दौरान थानों और दुकानों में अपने असलहे जमा किए थे। उनमें तमाम लोग ऐसे हैं, जो कई साल बाद भी अपने हथियार उठाने नहीं पहुंच रहे हैं।

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कारतूस खरीदने के भी कड़े नियम

असलहे का लाइसेंस जारी कराना तो कठिन होने के साथ ही कारतूस खरीदने के लिए भी कड़े नियम हैं। पहले कारतूस खरीदने के लिए केवल लाइसेंस दिखाना होता था। दुकानदार उसी लाइसेंस के पीछे कारतूस की संख्या लिख देते थे। इसके बाद वह दुकान से कारतूस खरीद लेते थे, लेकिन अब एक-एक कारतूस का हिसाब रखना होता है। अगर कोई कारतूस खर्च किया है तो उसका खोखा भी रखना पड़ता है। अब कारतूस खरीदने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। पुलिस द्वारा जांच की जाती है। इसके बाद रिपोर्ट डीएम कार्यालय भेजी जाती है। तब जाकर कारतूस खरीदने की अनुमति मिलती है।
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