प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का फैसला लेकर भ्रष्टाचार पर भले ही चोट मारी हो। लेकिन सरकारी विभागों के बाबू का खेल खत्म नहीं हो रहा है। ताजा मामला ट्रेजरी विभाग में सामने आया है। यहां गुरुवार को गुलाबी नोटों के फेर में एक बाबू फंस गया।
पारिवारिक पेंशन के एरियर का भुगतान करने के नाम पर उसने निजी स्कूल संचालक से 40 हजार रुपये की मांग की थी। उस स्कूल संचालक उसे दो दो हजार के पांच नोट थमाए तो बाबू ने चौबीस घंटे में एरियर के भुगतान करने का भरोसा दे दिया। इसी बीच एंटी करप्शन की टीम ने उसे दबोच लिया।
केपी सिंह ने बताया कि जब वह उसके पास एरियर के बारे में जानकारी करने गया था। तब बाबू ने फाइनल चेक करने के बाद बताया गया था कि उनकी मां को एक लाख 79 हजार रुपये मिलेंगे। लेकिन फाइनल तब ही आगे बढ़ाई जाएगी। जब वह उसे 25 प्रतिशत हिस्सा देंगे।
बाबू ने कहा कि रकम ऊपर तक भेजी जाती है। हमारे हाथ में तो केवल हजार दो हजार रुपये ही बचते हैं। गुरुवार को बाबू पकड़ा गया तब भी उसने कहा कि रिश्वत की रकम वह ऊपर तक पहुंचाता है। केवल अकेला नही नहीं खाता है। बाबू के इस बयान के बाद से ट्रेजरी विभाग में तैनात अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं।