सोर्सिंग हब की बंद पड़ी बिल्डिंग
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मुरादाबाद। निर्यातकों के लिए बनाई गई सोर्सिंग हब की बिल्डिंग खंडहर बन रही है। जिले में तीन महीने पहले आए निर्यात मंत्री सिद्घार्थनाथ सिंह के सामने यह मामले उठने के बाद शासन इस पर गंभीर हो गया है। शासन ने इस भवन को चालू करने की बाबत एमडीए से सुझाव मांगा था, जिस पर प्राधिकरण ने सोर्सिंग हब के भवन को सशर्त किराए पर देने के लिए प्रस्ताव भेज दिया है।
दिल्ली रोड पर नेशनल हाईवे के किनारे वर्ष 2007 में सोर्सिंग हब की वातानुकूलित विशाल इमारत बनाई गई थी। शुरू में इसकी लागत 22 करोड़ रुपये थी, लेकिन जब यह बनकर तैयार हुई तो बढ़ते बढ़ते 32 करोड़ हो गई थी। इसके निर्माण में घपलेबाजी को लेकर तत्कालीन एमडीए प्रशासन ने भुगतान पर रोक लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू करा दी थी। ठेकेदार पर मुकदमा कराया गया। वहीं ठेकेदार भी कोर्ट चला गया, जिससे सोर्सिंग हब का निर्माण और इसमें बनी दुकानों के आवंटन रुक गए थे। हालांकि इस बीच जिन निर्यातकों ने आवंटन कराया, उनके पैसे भी फंस गए। 13 साल में यह बिल्डिंग खंडहर हो गई है। सोर्सिंग हब की बिल्डिंग की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें एस्केलेटर और लिफ्ट भी लगी है। लेकिन अनेदखी के चलते ये जंग खा रहे हैं। 18 दिसंबर को निर्यातक सम्मेलन में आए मंत्री के सामने निर्यातकों ने सोर्सिंग हब को चालू कराने की मांग उठाई थी। मंत्री ने आश्वासन भी दिया था। अब शासन से इस बाबत एमडीए के पास पत्र आया तो इसकी फाइल फिर खुल गई है। एमडीए उपाध्यक्ष यशु रुस्तगी ने सोर्सिंग हब को सरकारी विभाग को सशर्त किराए पर देने के लिए शासन को पत्र भेज दिया है। शासन से इसे हरी झंडी मिलते ही सोर्सिंग हब के दिन बहुर सकते हैं।
शासन से मिली हरी झंडी तो तय हो जाएगा सोर्सिंग हब का भविष्य
ड्रीम प्रोजेक्ट सोर्सिंग हब शुरू होने से पहले खंडहर में बदल गया है। वहीं हब की दुकानों में कई निर्यातकों के लाखों रुपये भी फंसे हैं। शासन ने संज्ञान में लिया है, जिससे सोर्सिंग हब को भविष्य तय हो सकता है। मुरादाबाद में दो हजार से अधिक निर्यातक हैं। सालाना करीब साढ़े आठ हजार करोड़ का निर्यात कारोबार करते हैं। यदि यह चालू हो गया तो मुरादाबाद के निर्यात को पंख लग जाएंगे। यहां आने वाले विदेशी कंपनियों के लोगों को एक ही प्लेटफार्म पर सभी उत्पाद देखने को मिल जाएंगे।
सोर्सिंग हब को लेकर शासन से मिले पत्र के बाद प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव के तहत इसे किसी सरकारी विभाग को सशर्त किराए पर दिया जाएगा। शासन से हरी झंडी मिलते ही इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सर्वेश कुमार गुप्ता, सचिव एमडीए।