मुरादाबाद। कांशीराम नगर स्थित गौतम बुद्ध पार्क में सीनियर सिटीजन केयर सेंटर निर्माण को लेकर हुए विवाद के बाद पैदा हुआ सफाई संकट अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। एक सप्ताह पहले इस मुद्दे पर अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम की ओर से पार्क के अंदर सफाई जरूर कराई गई लेकिन पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास अब भी कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इसके चलते स्थानीय लोगों की परेशानी कम नहीं हो पा रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई। पार्क के भीतर झाड़ू और कचरा उठाने का काम कराया गया लेकिन गेट के पास जमा कचरा, सूखी पत्तियां और प्लास्टिक कचरों को नहीं हटाया गया। इसी प्रवेश द्वार से पार्क में रोजाना सैकड़ों लोग प्रवेश व निकास करते हैं। मलखान सिंह का कहना है कि पार्क में सीनियर केयर सेंटर के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों और बौद्ध संगठनों ने विरोध किया था। बाद में बसपा सुप्रीमो मायावती के हस्तक्षेप के बाद नगर निगम ने निर्माण कार्य रोक दिया था लेकिन इसके बाद से ही पार्क में सफाई और रखरखाव की व्यवस्था भी बंद कर दी गई थी।
करीब तीन महीने तक सफाई व्यवस्था पूरी तरह से बाधित रही। स्थानीय लोग खुद ही पार्क की सफाई कर रहे थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम ने निर्माण रुकने के बाद पार्क से ध्यान हटा लिया। जिससे बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम टहलने आने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। मलखान सिंह बताते हैं कि प्रवेश द्वार के पास स्थानीय लोग ही सप्ताह में दो दिन समय निकालकर स्वयं सफाई कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि पार्क सार्वजनिक संपत्ति है और इसका रखरखाव निगम की जिम्मेदारी है लेकिन मजबूरी में उन्हें खुद आगे आना पड़ रहा है। स्थानीय पार्षद हुकुम सिंह सैनी का कहना है कि पार्क के अंदर सफाई करा दी गई थी प्रवेश द्वार पर गंदगी की शिकायत उन्हें मिली है। इस समस्या को लेकर वह सुनिश्चित कराएंगे की सफाई हो।
- लोगों की साफ मांग
- गौतम बुद्ध पार्क को किसी विवाद की भेंट न चढ़ाया जाए। यह पार्क आसपास के सैकड़ों परिवारों के लिए खुली जगह है जहां बच्चे खेलते हैं और बुजुर्ग सुकून के पल बिताते हैं।विशेषकर प्रवेश द्वार पर जमी गंदगी को साफ कराया जाए और नियमित सफाई व्यवस्था बहाल की जाए ताकि पार्क फिर से स्वच्छ और उपयोगी बन सके। - विमलधीर, अध्यक्ष, बौद्ध जन कल्याण समिति
- पार्क में रोजाना सैकड़ों लोग टहलने के लिए आते हैं। सफाई नियमित रूप से होनी चाहिए। तीन महीने तक सफाई पूरी तरह से ठप ही रही। खबर प्रकाशित होने के बाद भी सिर्फ पार्क के भीतर ही सफाई कराई गई है। - डॉ. रामपाल सिंह, महामंत्री, बौद्ध जन कल्याण समिति