मुरादाबाद। रामगंगा की तरह ही गांगन नदी भी मुरादाबाद जिले की जीवनधारा से जुड़ी है। यह बिजनौर से निकलकर मुरादाबाद में करीब 55 किमी की यात्रा करके अंत में यहीं पर राम गंगा में विलय होती है। अफसोस की बात यह है कि यह नदी सर्वाधिक अतिक्रमण की चपेट में है, कभी 150 मीटर की चौड़ाई में बहने वाली यह नदी कहीं कहीं सिकुड़कर 10 से 15 मीटर तक रह गई। इसकी धारा तो नाले का रूप ले चुकी है। एक अनुमान के मुताबिक नदी पर करीब डेढ़ हजार कब्जे हैं। किसानों ने भी नदी की भूमि पर खेती करनी शुरू कर दी है। अभी इस पर अतिक्रमण का सिलसिला थमा नहीं है।
गांगन नदी बिजनौर के नगीना - नजीबाबाद के बीच से सालारा झील से निकलती है और कांठ तहसील क्षेत्र के धर्मपुरा गांव से मुरादाबाद जिले से प्रवेश करती है। मुरादाबाद के दर्जनों गांवों से गुजरते हुए मुरादाबाद महानगर के किनारे से गुजरती है। यही कारण है कि इस नदी पर सर्वाधिक अतिक्रमण किया गया है, गांगन नदी सदर तहसील क्षेत्र में सैफपुर पल्ला गांव के पास जाकर राम गंगा में विलय करती है। मुरादाबाद में इसकी लंबाई करीब 55 किमी है। रामपुर जिले के कुछ क्षेत्र में जाती है। इस नदी में खासतौर पर बारिश के दौरान अधिक पानी देखा जाता है। बिजनौर में इस नदी के स्वरूप को वापस लौटाने की कवायद शुरू हुई थी, आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की टीम भी यहां पहुंची थी लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। मुरादाबाद जिले में भी गांगन नदी पर अतिक्रमण का मुद्दा एमडीए का बैठकों में भी उठ चुका है, तब एमडीए ने एक प्रस्ताव पारित करके नदियों के 74 मीटर के दायरे में किसी तरह का निर्माण नहीं हो सकता लेकिन इस पर कभी अमल नहीं किया गया। एमडीए कार्यालय के अनुसार 30 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मंडलायुक्त सुधीर गर्ग की अध्यक्षता में हुई एमडीए बोर्ड की 110वीं बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ था। इसी में रामगंगा किनारे 12 किमी लंबे तटबंध और रिवर फ्रंट का एलाइनमेंट स्वीकृत किया गया था।
सच्चाई यह है कि गांगन नदी की कीमती जमीन पर लगातार कब्जे होते रहे और एमडीए, सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। बिना मानचित्र के ही नदी क्षेत्र में फैक्टरियां बना ली गईं। कभी एमडीए ने कुछ फैक्टरी संचालकों को नोटिस दिया तो कुछ से जुर्माना वसूला लेकिन न अतिक्रमण रुका और ही निर्माण होने का सिलसिला। अब यह फैक्टरियां नदी में केमिकलयुक्त पानी बहा कर प्रदूषण भी फैला रही हैं लेकिन कार्रवाई कोई नहीं हो रही है। पिछले दिनों एमडीए के अध्यक्ष ने गांगन नदी का सर्वे कराकर अवैध निर्माणों को चिन्हित करने, संबंधित विभागों की भी जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी लेकिन अभी तक बात कुछ आगे नहीं बढ़ सकी। परिणाम यह है कि नदी का दायरा सिकुड़ रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम की गवाह रही गांगन नदी
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मुरादाबाद में गांगन नदी के तट पर भारतीय क्रांतिकारियों और अंग्रेजों के बीच युद्ध हुआ था। यह इस नदी का एतिहासिक पक्ष भी है।