मुरादाबाद। एक ओर जहां देश भर में प्रदूषण से मुक्ति पाने के लिए तमाम उपायों पर चर्चा चल रही है तो वहीं जिले में स्थापित प्रदूषण जांच केंद्र के संचालक नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों की ओर से बिना वाहन चेक किए प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। चालकों को भी नहीं पता कि उनके वाहन से निकलने वाले धुएं में प्रदूषण का स्तर क्या है।
परिवहन विभाग के अनुसार जिले में मान्यता प्राप्त 65 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। दिल्ली रोड, रामपुर रोड, कांठ रोड, लाकड़ी रोड समेत अन्य जगहों पर स्थित अधिकतर प्रदूषण जांच केंद्रों पर वाहनों के केवल नंबर प्लेट की फोटो खींचकर प्रमाणपत्र जारी कर दिया जा रहा है। इसके बावजूद इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय के बाहर करीब 10 प्रदूषण जांच केंद्र हैं। इनमें से अधिकतर बिना वाहनों के जांच ही प्रमाणपत्र जारी कर रहे हैं। छह महीने के लिए दो पहिया वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र 75 से 80 रुपये और चार पहिया वाहनों का प्रमाणपत्र 150 रुपये में बनाया जा रहा है।
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दोपहर 2:32 बजे
ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ रोड पर कुलदीप प्रदूषण जांच केंद्र पर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अमर उजाला की टीम ने पूछताछ की। केंद्र ऑपरेटर आदित्य ने बताया कि बिना वाहन के ही प्रदूषण प्रमाणपत्र बन जाएगा। इसके लिए वाहन के फोटो की जरूरत है। फोन पर फोटो मंगवा लीजिए और उसी के आधार पर प्रमाणपत्र दे देंगे। छह महीने के लिए प्रमाणपत्र बनेगा। प्रदूषण प्रमाणपत्र के 80 रुपये लगेंगे।
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दोपहर 2:51 बजे
ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय के सामने करीब 200 मीटर दूरी पर स्थित प्रदूषण जांच केंद्र पर प्रमाणपत्र बनवाने के बारे में पूछताछ की गई। केंद्र ऑपरेटर मोहित सिंह ने बताया कि वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाने के लिए उसकी जांंच की जरूरत नहीं है। केवल वाहन की नंबर प्लेट की फोटो होनी चाहिए। फोटो से ही छह महीने के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा। दोपहिया वाहन के लिए 80 रुपये और चार पहिया वाहन के लिए 150 रुपये लगेंगे।
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शाम 4:06 बजे
अमर उजाला की टीम 4:06 मिनट पर लाकड़ी रोड स्थित ट्रू वैल्यू के पास हिंदुस्तान पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केंद्र पर पहुंची। केंद्र पर प्रदूषण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑपरेटर से पूछताछ की। केंद्र ऑपरेटर निशांत ने बताया कि प्रदूषण प्रमाणपत्र के लिए वाहन लाने की कोई जरूरत नहीं है। वाहन के नंबर प्लेट की फोटो खींचकर फोन पर मंगवा लीजिए। 80 रुपये में छह महीने के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र बना देंगे।
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यह है प्रदूषण के मानक
-परिवहन विभाग के एआरटीओ (प्रशासन) हरिओम ने बताया कि वाहनों के प्रदूषण मापदंड अलग-अलग होते हैं। सामान्यत: वाहन से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनो ऑक्साइड की अधिकतम मात्रा 1000 मिली ग्राम प्रति किमी और और हाइड्रो कार्बन की अधिकतम मात्रा 100 एमजी प्रति किमी तक होनी चाहिए। अगर धुएं में कार्बन मोनो ऑक्साइड तथा हाइड्रो कार्बन की मात्रा निर्धारित मापदंड से ज्यादा है, तो उस वाहन को सड़क पर चलने लायक नहीं माना जाता। क्योंकि कार्बन मोनो ऑक्साइड में विषैली गैस निकलती है। यह हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है और दम घुटने से मृत्यु हो सकती है।
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पर्यावरण में ऑक्सीजन होने लगती है कम
- वनस्पति विज्ञान की विशेषज्ञ व पर्यावरणविद् डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि वाहनों के धुएं से कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, शूट पार्टिकिल्स, पीएम-2.5 निकलता है। इससे पर्यावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसके कारण सबसे अधिक बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होती है। चौराहों पर जाम की स्थिति में आस-पास की हवा काफी दूषित हो जाती है। इसके वहां के आस-पास के लोगों के बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है। पुरानी गाड़ियों के धुएं से सीसा (लेड) निकलता है। यह लोगों के लिए काफी घातक होता है।
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-मेरे पास इस तरह की कोई जानकारी नहीं आई है। संभागीय निरीक्षक को भेजकर जांच करवाएंगे। जांच प्रदूषण केंद्र संचालक बिना वाहनों की जांच किए प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं तो उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश सिंह, आरटीओ (प्रशासन)