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Moradabad News: आयुष्मान में फर्जीवाड़ा, सात निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की तलवार

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मुरादाबाद। आपातकालीन कक्ष न होने, बाल रोग विशेषज्ञ की 24 घंटे उपलब्धता न होने, मरीजों को बिना जरूरत आईसीयू व विभिन्न वार्डों में शिफ्ट कर उपचार दिखाने और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों के उल्लंघन में जिले के सात अस्पतालों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की स्टेट हेल्थ एजेंसी ने सातों अस्पतालों को संबद्धता समाप्त करने की चेतावनी दी है।
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इन अस्पतालों में नवजात शिशुओं की फाइलों पर विशेषज्ञ के बजाय नर्सिंग स्टाफ द्वारा नोट्स दर्ज किए जाने और एक ही डॉक्टरों के नाम दो अस्पतालों के पैनल में पाए जाने पर सवाल उठे। एनआईसीयू में भर्ती नवजातों की मॉनिटरिंग में खामियां, ब्लड ट्रांसफ्यूजन संबंधी रिकॉर्ड में कमी, पंजीकृत चिकित्सकों के अलावा अन्य डॉक्टरों के कार्यरत मिलने तथा जन्म प्रमाणपत्रों का ऑनलाइन अपडेट न किए जाने जैसी अनियमितताएं पकड़ी गईं। सातों अस्पतालों को पत्र जारी करते हुए सात दिन में जवाब मांगा गया है। यदि एजेंसी जवाब से संतुष्ट नहीं हुई तो अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता समाप्त कर दी जाएगी। हाल ही में इन अस्पतालों की संबद्धता निलंबित की गई थी। इन अस्पतालों में फोटॉन सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर, सर्जीमेड हॉस्पिटल, एवीएस हॉस्पिटल, यूनिक हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर, एमआई हॉस्पिटल, सलेक्ट हॉस्पिटल शामिल हैं। स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इन अस्पतालों की शिकायतों और ऑडिट के बाद प्रशासनिक जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि कई मामलों में योजना के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया और संदिग्ध श्रेणी के दावे भी बड़ी संख्या में किए गए। अस्पतालों से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद इन अस्पतालों का भुगतान भी रोक दिया गया।
इसके बाद मामला 30 जून को हुई स्टेट इम्प्लीमेंटेशन कमेटी की बैठक में रखा गया। समिति ने अस्पतालों के रिकॉर्ड, पत्रावली और प्रस्तुत स्पष्टीकरण का परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली आयुष्मान भारत योजना के मानकों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर डीलिस्टिंग की कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया। सबसे गंभीर टिप्पणी यूनिक हॉस्पिटल को लेकर सामने आई। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। कोई मरीज भर्ती नहीं था और अस्पताल में उपलब्ध बताई गई मशीनों से सेवाएं संचालित नहीं हो रही थीं। इसके बावजूद अस्पताल आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध मिला। समिति ने अस्पताल के क्लेम व्यवहार को भी सामान्य से अधिक बताते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज की है।
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फोटॉन सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सर्जीमेड हॉस्पिटल और एवीएस हॉस्पिटल के संबंध में भी समिति ने कहा है कि इन संस्थानों ने कई मामलों में योजना के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया तथा संदिग्ध श्रेणी के दावे प्रस्तुत किए। इसे अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल मानते हुए सात दिन में स्पष्ट जवाब मांगा गया है। यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो सातों अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से बाहर कर दिया जाएगा, जिससे वहां योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद हो जाएगा।


सात अस्पतालों में निरीक्षण के बाद स्टेट हेल्थ एजेंसी ने इनसे जवाब मांगा था। जवाब से एजेंसी संतुष्ट नहीं है। अस्पतालों में कई खामियां मिली हैं। इन्हें अंतिम चेतावनी के रूप में सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। इसके बाद एजेंसी कार्रवाई कर सकती है।
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- डॉ. आरके शर्मा, डिप्टी सीएमओ
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