भोजपुर के पंद्रह साल पुराने हत्या के मामले में अदालत ने दो सगे भाइयों समेत चार मुलजिमों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
भोजपुर के गांव मदनीपुर निवासी मित्रपाल ने 22 दिसंबर 2007 को भोजपुर थाने में केस दर्ज कराया था। जिसमें उसने आरोप लगाया था कि शाम करीब चार बजे मेरे बड़े भाई करन सिंह अपने घर के पास ही बनवारी और जयपाल के साथ बैठे थे। इसी दौरान वहां रामपाल, पप्पू, दलीप और उसका जगत सिंह आ गए। जिनके हाथों में तमंचे थे। जिन्होंने आते ही फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली करन सिंह के कान के पास लगी। गोली चलने की आवाज सुनकर मेरा दूसरा भाई सरवन भी आ गया। उस पर भी फायर किया गया। सरवन किसी तरह अपनी जान बचा कर वहां से भागा। जबकि करन सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सभी के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ग्यारह मोहित शर्मा की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता समर्थ शुक्ला ने सरकार की ओर से पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद चारों आरोपियों को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ प्रत्येक पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने आदेश दिया है कि जुर्माने की राशि से 70 प्रतिशत रकम मृतक की पत्नी को दी जाएगी।