महिला जिला अस्पताल में सोमवार को डिस्चार्ज होने के बाद अस्पताल के बाहर ठंड में जच्चा और बच्चा परेशान रहे। उन्हें घर जाने के लिए एंबुलेंस का घंटों इंतजार करना पड़ा।
डिलारी के गुड़हनपुर निवासी मो. फारुख ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को पिछले सोमवार को भर्ती कराया। इसी दिन डिलीवरी हुई।
एक सप्ताह बाद सोमवार को जब उसे डिस्चार्ज किया गया तो वह अपनी पत्नी और नवजात शिशु को लेकर अस्पताल के बाहर आए और घर छोड़ने के लिए 102 नंबर पर काल की। लेकिन एक घंटा बीतने के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई फिर कॉल की इसके बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। फारुख ने 11 बजे से लेकर पौन तीन बजे तक करीब 20 बार फोन किया।
तब जाकर उन्हें तीन बजे के करीब एंबुलेंस लेने आई। महिला अस्पताल में 102 नंबर की 6 एंबुलेंस हैं। 102 नंबर पर कॉल करने पर इआरसी लखनऊ सेंटर कॉल जाती है। इसे बाद स्थानीय स्तर पर मरीज और एंबुलेंस की दूरी के अनुसार सबसे नजदीक के एंबुलेंस चालक को इसकी सूचना दी जाती है।
जिस एंबुलेंस चालक ने तीन बजे के करीब अस्पताल पहुंच कर फार्रुख को उनके घर पहुंचाया। चालक ने बताया कि उनके पास लखनऊ से एक सूचना दो बजकर 41 मिनट पर आई और वह पौने तीन बजे फारुख के पास पहुंच गए। चालक ने बताया कि हो सकता है कि लखनऊ से अन्य एंबुलेंस चालकों को सूचना दी गई हो और वह अस्पताल से काफी दूर रहे होंगे। इस कारण देरी हुई।
इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। अगर मरीज को चार घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली तो उन्हें मुझे आकर बताना चाहिए था। एंबुलेंस बाहर ही खड़ी रहती हैं। अगर एंबुलेंस बाहर नहीं थी और देर से पहुंची तो इसका कारण चालकों से पूछ कर ही बताया जा सकता है।
- डा. कल्पना सिंह, सीएमएस महिला अस्पताल