दुनिया के भर के आजमीन खाना-ए-काबा की जियारत को मक्का शरीफ पहुंच चुके हैं। जहां खुदा की इबादत में मशगूल हैं। जो बच गए हैं वह सात सितंबर तक इबादत की सरजमीं पर पहुंच जाएंगे। लेकिन इबादत की असल शुरुआत इस्लामिक महीने जिलहिज की आठ तारीख से होगी। जो 12 जिलहिज तक चलेगी। आजमीन तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक करीब 33 किमी का सफर तयकर हज के अरकान पूरे करेंगे।
वैसे सऊदी अरब की सरजमीं पर पहुंचने के साथ ही आजमीनों की इबादत का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन उनके लिए इस्लामिक महीने के पांच दिन खास होते हैं। जो जिलहिज की 8 से 12 तारीख के बीच का समय है। इस दौरान हजयात्रियों को अलग-अलग समय पर तकरीबन 33 किमी का सफर तय करना होता है। इस बीच निर्धारित समय सीमा के अंदर ही इबादत की रस्म अदा की जाती है। इसकी शुरुआत आठ जिलहिज यानी रविवार को होगी। हज ट्रेनर हाजी मुख्तार असलम ने बताया कि हज के पाक सफर पर पांच दिन खास होते हैं। इस दौरान ही हज के सारे अरकान पूरे किए जाते हैं।
किस तारीख को कहां की रवानगी
08 जिलहिज : आजमीन मक्का से मिना के लिए रवाना होते हैं। इसके लिए उन्हें पांच किमी का सफर तय करना होता है।
09 जिलहिज : सुबह के वक्त हजयात्री 6.5 किमी का सफर तय कर मिना से अरफात पहुंचते हैं।
09 जिलहिज : शाम के वक्त अरफात से मुदलफा के लिए रवाना होते हैं। इसकी दूरी 5.5 किमी है।
10 जिलहिज : सुबह एक किमी का सफर तय कर मुदलफा से मिना पहुंचना होता है।
10 जिलहिज : दोपहर में मिना से मक्का जाना होता है।
10 जिलहिज : शाम को फिर मक्का से मिना जाते हैं।
12 जिलहिज : शाम को मिना से आजमीन मक्का के लिए रवाना होते हैं।