उत्तर प्रदेश के तालाबों में थाइलैंड की मछली नजर आएगी। ‘पंगेशियस सूची’ नाम की इस मछली को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मंडल के पांच तालाबों में पाला जाना है। इस मछली की खासियत है कि इसमें कांटे बहुत कम होते हैं और एक हेक्टेयर में तीस हजार किलो तक का उत्पादन लिया जा सकता है। अभी तक उत्तर प्रदेश के तालाबों में रोहू, कतला, नैन, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और कामन कार्प मछलियों का पालन किया जा रहा है।
मुरादाबाद मंडल के ही 2500 तालाबों में मत्स्य पालन हो रहा है। करीब तीन सौ नए तालाबों को भी मत्स्य पालन के लिए तैयार किया जा रहा है। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए शासन ने भी मछली की कई नई किस्मों को यहां के तालाबों में पहुंचाने की तैयारी कर ली है। थाइलैंड की मछली ‘पंगेशियस सूची’ का पालन होने जा रहा है। मत्स्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एनएस रहमानी ने बताया कि मुरादाबाद, संभल, बिजनौर, रामपुर और अमरोहा के दो दो तालाबों में इस मछली का पालन होगा। इस मछली में कांटे कम होते हैं जिसके कारण मार्केट से डिमांड ज्यादा रहती है।
यह मछली सात महीने में डेढ़ किलो तक की हो जाती है। जबकि सामान्य मछलियों को इतने वजन का होने में एक साल लगता है। पंगेशियस सूची का उत्पादन भी दूसरी मछलियों के मुकाबले काफी ज्यादा है। एक हेक्टेयर में इस मछली का उत्पादन तीस हजार किलो तक का है। मत्स्य विभाग के अफसरों का कहना है कि पश्चिमी बंगाल में पंगेशियस सूची का पालन हो रहा है। अभी तक दूसरे राज्यों को भी यहीं से मछली भेजी जाती है। जब यूपी में पालन होने लगेगा तो यहां से भी आसपास के राज्यों को इस मछली की सप्लाई की जा सकेगी।