भीषण गर्मी के चलते बिजली खपत बढ़ने लगी है। ऐसे में सभी पावर हाउस में कोयला की डिमांड भी लगातार बढ़ रही है। जिसे देखते हुए रेलवे ने कोयले के रैक खास श्रेणी में रखा है। कोयले के रैक को गुजारने के लिए यात्री गाड़ियों को भी रोक दिया जा रहा है।
जिससे पावर हाउस में कोयले की कमी न पड़े और बिजली का प्रोडक्शन बना रहे। ऐसे में अधिकांश एक्सप्रेस गाड़ियां का समय से संचालन गड़बड़ा रहा है। रेलवे मुख्य तौर पर मालगाड़ियों के संचालन में यात्री गाड़ियों की तुलना में दूसरे नंबर पर रखता है।
जिसके चलते मालगाड़ियां गंतव्य तक पहुंचने में बहुत अधिक समय लगाती हैं। रूट नहीं मिलने के कारण कई कई दिन तक खड़ी रह जाती हैं। गर्मियों में बिजली की खपत तेजी से बढ़ती है। सुप्रीम कोर्ट भी सरकारों को सूखे से निपटने के लिए और अधिक इंतजाम करने का आदेश दे चुका है।
जिसके चलते रेलवे के पास गुड्स ट्रेन में सबसे अधिक लोड कोयले का रहता है। कई बार कोयला समय से नहीं पहुंच पाने के कारण पावर हाउसों में प्रोडक्शन बंद होने की स्थिति बन जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए कोयले का समय से पहुंचना बेहद जरूरी है।