आज साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा। इसे एक बड़ी खगोलीय घटना की दृष्टि से देखा जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण देश के कुछ भागों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण कल सुबह 10 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर दोपहर 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। बताया जा रहा है कि दोपहर 12 बजकर 10 मिनट पर यह अपने चरम पर होगा।
इसमें सूरज और पृथ्वी के बीच में चांद इस तरह आ जाएगा कि सूरज का आधे से ज्यादा हिस्सा छिप जएगा। बता दें कि तीस सेंकड के लिए सूरज पूरी तरह चांद की छाया से ढक जाएगा। इस दौरान सूरज को वलयाकार रूप में देखा जा सकेगा, जिसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। जिसके कारण इस घटना को वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
देश में देहरादून, मसूरी, कुरुक्षेत्र और टिहरी आदि में सूर्य वलयाकार रूप में दिखाई देगा। जबकि अन्य स्थानों पर आंशिक सूर्य ग्रहण ही देखा जा सकेगा। राजधानी दिल्ली में भी लगभग रिंग ऑफ फायर का नजारा देखा जा सकेगा। बता दें कि 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन होता है। जानकारी के अनुसार 21 जून को लगने वाला यह सदी का दूसरा सूर्य ग्रहण है। इससे पहले 21 जून 2001 को सूर्य ग्रहण की घटना हुई थी।
वैज्ञानिक दृष्टि से क्या है सूर्य ग्रहण
जब चांद, पृथ्वी और सूर्य के बीच से होकर गुजरता है। पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूरा या आंशिक रूप से चांद की छाया से ढका होता है। साधारण शब्दों में कहा जाए तो जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चांद आ जाता है। इस दौरान सूर्य कुछ समय के लिए चांद से ढक जाता है। तब सूर्य ग्रहण का नजारा देखा जा सकता है।
बरतें विशेष सावधानियां
सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए, इसके हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं। हिंदू कालेज मुरादाबाद के भौतिकी के प्रोफेसर अनिल चौहान बताते हैं कि इस दौरान सूर्य से हानिकारक विकिरण निकलता है। जिससे आंखों को बेहद नुकसान हो सकता है, इससे आंखों के टिशु और आइरिस को क्षति पहुंचती है। उन्होंने कहा कि सूर्य ग्रहण देखने के लिए साधारण चश्मे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सोलर व्यूइंग ग्लास, सोलर फिल्टर या आइक्लिप्स ग्लास का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा एक्स-रे फिल्म से भी साधारण: सूर्य ग्रहण की घटना को देखा जा सकता है। दूरबीन या पिनहोल द्वारा देखने से नुकसान पहुंच सकता है।