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यूएसए को एक्सपोर्ट होना था 12 करोड़ का माल, जलकर राख हुआ

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मुरादाबाद। पिछले एक दशक से देश का टॉप एक्सपोर्ट अवार्ड हासिल कर रही सीएल गुप्ता एक्सपोर्टस फैक्ट्री में सोमवार को लगी भीषण आग में करीब 12 करोड़ रुपये के पीतल व कांच के उत्पाद जलकर चूरा हो गए। यह सभी उत्पाद यूएसए को एक्सपोर्ट होने थे। शिपमेंट के लिए कंटेनर फैक्ट्री में पहुंच चुके थे और अगले दो दिन में सभी कंटेनर रवाना होने थे। आग की वजह तो फिलहाल पता नहीं चली है लेकिन पीतल नगरी की सबसे बड़ी निर्यात फैक्ट्री में लगी भीषण आग से निर्यातकों को हिलाकर रख दिया है।
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सीएल गुप्ता एक्सपोर्टस के मालिक अजय गुप्ता का कहना है कि फैक्ट्री में अलग - अलग डिपार्टमेंट बने हैं। सभी में पैकिंग सेक्शन बनाए गए हैं। जिस सेक्शन में सोमवार को आग लगी उसके द्वितीय तल पर एक्सपोर्ट के लिए तैयार पैकिंग रखी जाती है। इसमें पीतल और कांच से बने उत्पाद थे। उन्होंने बताया कि शुरुआती अनुमान के मुताबिक फैक्ट्री के इस हिस्से में करीब 12 करोड़ रुपये का तैयार माल रखा था। दोपहर करीब एक बजे अचानक फैक्ट्री के इस हिस्से में द्वितीय तल पर आग लगी, जहां पैक उत्पाद रखे थे। देखते - देखते आग फैल गई और पूरा सामान जलकर राख हो गया। अजय गुप्ता का कहना है कि आग के कारणों का पता नहीं है। फैक्ट्री में फिटिंग भी उच्च गुणवत्ता वाली है। ऐसे में शार्ट सर्किट की भी आशंका कम है। जहां आग लगी वहां केमिकल भी नहीं था। ऐसे में आग के कारणों के बारे में अभी कुछ नहीं पता। उन्होंने बताया कि 12 करोड़ रुपये का जो सामान जलकर राख हुआ है वह यूएसए को निर्यात होने वाला था। आग की लपटों को काबू करने में करीब दो से ढाई घंटे लगे। लेकिन इतनी देर में टीन शेड पूरी तरह जलकर उड़ चुका था। पीतल और कांच के जो भी उत्पाद इसमें थे वह बुरी तरह जलकर चूरा बन गए । लेकिन गनीमत रही कि कोई फैक्ट्री कर्मी आग की चपेट में नहीं आया। देर रात तक भी फैक्ट्री के इस हिस्से में गत्तों से आग सुलग रही थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां उस पर काबू करने की कोशिशों कर रही थीं।
दूसरे हिस्सों में आग को रोकना था चुनौती
मुरादाबाद।
चौधरपुर में करीब 500 बीघा एरिया में फैली सीएल गुप्ता एक्सपोर्टस फैक्ट्री के जिस सेक्शन से आग की लपटें उठीं उसके आसपास फैक्ट्री के दूसरे डिपार्टमेंट भी हैं। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन के सामने आग को एक सेक्शन से दूसरे तक फैलने से रोकने की चुनौती थी। यहां बड़े पैमाने पर लकड़ी के उत्पाद भी निर्यात के लिए तैयार किए जाते हैं। बड़ा खतरा यह था कि यदि आग इन हिस्सों तक फैलती तो और भी बड़ा नुकसान हो सकता था।
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