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Moradabad News: गुस्से, चिड़चिड़ेपन का कारण तलाशें, नहीं होगा डिप्रेशन

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मुरादाबाद। यदि आप अपनी बात को किसी से कह नहीं पाते तो अंदर ही अंदर घुटन महसूस होने लगती है। जब आप जरूरत से ज्यादा किसी बात को बर्दाश्त करते हैं तो गुस्सा व चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, जिससे डिप्रेशन जन्म लेता है। इसलिए गुस्से व चिड़चिड़ेपन का कारण तलाश कर उसका समाधान करना चाहिए। इसमें दोस्तों, रिश्तेदारों व परिवार के सदस्यों से संवाद स्थापित करना सबसे अच्छा उपचार है। इसे व्यवहार चिकित्सा कहते हैं। यह सलाह शहर के न्यूरो साइकायट्रिस्ट डॉ. हिमांशु गुप्ता ने दी। उन्होंने मरीजों के सवालों के जवाब भी दिए।
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सवाल : मेरा बेटा 20 साल का है। मानसिक रोग से परेशान है। अभी तक तो सही चल रहा था मगर दो महीने से वह हाथ में काल्पनिक मोबाइल लेकर दिन भर बातें करता है। मीटिंग व जॉब लगवाने की बातें करता है। हमें क्या करना चाहिए। - संजीव सक्सेना
जवाब : यह मानसिक बीमारी ही है। यदि आपके बेटे ने अब तक दवा शुरू नहीं की है तो फौरन डॉक्टर से मिलकर दवा शुरू कराएं। दवा से वह ठीक हो सकता है और आने वाले समय में नौकरी आदि में परेशानी नहीं होगी।
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सवाल : मेरी उम्र 22 साल है। मुझे गुस्सा बहुत आता है। छोटी-छोटी बात पर मैं घरवालों से बहस करने लगती हूं। गुस्सा इतना बढ़ जाता है कि कभी-कभी खाना भी नहीं खाती। बाद में मुझे अफसोस होता है, मैं अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाती, क्या करूं। - अदिति
जवाब : यह सिर्फ एक लक्षण है, बीमारी नहीं। आप इसके कारण पर ध्यान दीजिए और उसका समाधान तलाश कीजिए। यदि कारण नहीं मिल रहा है तो डॉक्टर से मिलने की जरूरत है।

सवाल : मेरे बेटे की उम्र 17 साल है। वह लोगों के बीच बैठता है तो बुजुर्गों वाली बातें करता है और ऐसा दर्शाता है जैसे वास्तव में उसकी उम्र काफी अधिक है। पहले हमें लगा कि वह मजाक करता है लेकिन वह गंभीर है। हमें क्या करना चाहिए। - विजय गोस्वामी
जवाब : यदि यह लक्षण लगातार हैं तो आपको बेटे की काउंसिलिंग करनी चाहिए। यह मैनिया नामक बीमारी का संकेत हो सकता है। आप चिकित्सक से मिलकर परामर्श लें।
सवाल : मैं एक ही काम को बार-बार करता हूं, मुझे लगता है कि बाथरूम में पानी का नल खुला रह गया या मैं कमरे पर ताला लगाना भूल गया हूं। मैं भीतर से जानता हूं कि ऐसा कुछ नहीं है लेकिन दोबारा किए बिना मुझसे रुका नहीं जाता। ऐसा लगता है कि नहीं किया तो कुछ गलत हो जाएगा। - अनिल सिंह
जवाब : स्पष्ट रूप से यह ओसीडी की बीमारी के लक्षण हैं। शुरुआत में काउंसिलिंग व बातचीत से इसे रोका जा सकता है लेकिन ज्यादा समय हो गया है तो दवा लेनी ही पड़ेगी।

सवाल : मेरी उम्र 35 साल है। मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब करती हूं। अक्सर हर किसी से अपनी तुलना करने लगती हूं। मुझे लगता है कि मैं सबसे ज्यादा काम करती हूं। इसके कारण कई बार साथियों से झगड़ा हो जाता है। मुझे क्या करना चाहिए। - लाइबा नूर
जवाब : यह सोच आपको डिप्रेशन का शिकार बना सकती है। आपको सोचना होगा कि काम हम खुद के लिए करते हैं न कि किसी को दिखाने के लिए। आप अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर फोकस करें, इससे यह समस्या खुद कम हो जाएगी।
सवाल : जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, मैं खुद को उदास महसूस कर रहा हूं। मुझे लगता है कि जीवन में जो कुछ चल रहा है वह सब बेकार है। अब कुछ बचा नहीं है। कहीं जाने का, किसी से बात करने का भी मन नहीं करता। - आश्रय
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जवाब : यह सीजनल डिप्रेशन है, जो शरीर के अंदर हार्मोन्स प्रभावित होने से होता है। आपको डॉक्टर से मिलकर दवा लेनी चाहिए।
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