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Sambhal Riot: क्या संभल में 1978 को हुए दंगे की फिर से खुलेगी फाइल? एसपी ने इन सूचनाओं को लेकर दिया ये जवाब

Thu, 09 Jan 2025 11:17 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, संभल

सार

संभल में वर्ष 1978 का दंगा 29 मार्च को हुआ था। इस दंगे में शहर जल उठा था। हालात को संभालने के लिए प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया था।
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Sambhal Riot - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 में हुए दंगे की फाइल फिर खोलने की खबरों पर पुलिस की प्रतिक्रिया सामने आई है। पुलिस अधीक्षक केके विश्नोई ने कहा कि दंगों की दोबारा जांच नहीं केवल शासन द्वारा मांगी गई जानकारी को एकत्र किया जा रहा है। एसपी ने बताया कि स्थानीय एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने 17 दिसंबर को एक पत्र लिखकर 1978 में हुए दंगों का मुद्दा उठाया था। इसके बाद शासन ने इस संबंध में आख्या मांगी है। पुलिस द्वारा दंगों से जुड़ी सूचनाएं और तथ्य जुटाए जा रहे हैं। बता दें कि दिसंबर 2024 में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल दंगे पर वक्तव्य दिया। इसके बाद से इस दिशा में काम तेज हो गया था।  

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पुलिस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए दिया ये जवाब 
संभल जिले में 1978 के दंगों की दोबारा जांच को लेकर चल रही चर्चाओं पर पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की है। एसपी केके विश्नोई ने कहा कि दंगों की दोबारा जांच नहीं केवल शासन द्वारा मांगी गई जानकारी को एकत्र किया जा रहा है। एसपी ने बताया कि स्थानीय एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने 17 दिसंबर को एक पत्र लिखकर 1978 में हुए दंगों का मुद्दा उठाया था। इसके बाद शासन ने इस संबंध में आख्या मांगी है। पुलिस द्वारा दंगों से जुड़ी सूचनाएं और तथ्य जुटाए जा रहे हैं, जिनमें दंगों के दौरान हुई घटनाओं, नुकसान और अन्य संबंधित बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जा रही है। इसे शासन को भेजा जाएगी। एसपी ने इस बात पर जोर दिया कि दंगों की दोबारा जांच को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, वे पूरी तरह से भ्रामक हैं। वर्तमान में केवल सूचनाएं और तथ्य इकट्ठा किए जा रहे हैं, ताकि शासन के निर्देशों के अनुसार रिपोर्ट तैयार की जा सके।

29 मार्च 1978 को हुआ था दंगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिसंबर को विधानसभा में कहा था कि 1947 से लेकर अभी तक संभल में 209 हिंदुओं की जान दंगों के चलते गई है। संभल में 29 मार्च 1978 को दंगे के दौरान आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस घटना में कई हिंदू मारे गए थे। भय के चलते 40 रस्तोगी परिवारों को घर छोड़कर भागना पड़ा। पलायन के गवाह अभी मौजूद हैं। मंदिर में कोई पूजा करने वाला बचा नहीं था। घटना के 46 साल बाद अभी तक किसी को सजा तक नहीं मिली। प्रशासन और स्थानीय लोगों की सक्रियता से 46 साल से बंद मंदिर के पट खुले। इसके बाद से अधिकारी संभल दंगों से जुड़ी फाइलों को खंगालने लगे थे।

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संभल में दो महीने लगा था कर्फ्यू
संभल में वर्ष 1978 का दंगा 29 मार्च को हुआ था। इस दंगे में शहर जल उठा था। हालात को संभालने के लिए प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया था। फिर भी शहर में दोनों समुदायों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। ऐसी स्थिति में कर्फ्यू का अंतराल बढ़ता गया। संभल में दो महीने तक तक कर्फ्यू लगा रहा।

दुकान बंद कराने के दौरान बवाल ने ले लिया था दंगे का रूप
वर्ष 1976 में संभल में मस्जिद के इमाम की हत्या के बाद बवाल हो गया था। उस वक्त प्रशासन ने हालात काबू कर लिया था। लेकिन शहर में तनाव बरकरार था। राजनीतिक महत्वकांक्षी को लेकर मुस्लिम लीग के एक नेता ने बाजार में दुकानों को बंद करना शुरू किया था। दूसरे समुदाय के व्यापारियों ने इसका विरोध किया। मारपीट के हालात बनने पर नेता के साथी उन्हें छोड़कर माैके से भाग निकले। इन्हीं साथियों ने नेता के मारे जाने की अफवाह फैला दी। इसके बाद दंगा भड़क गया। दुकानों में लूटपाट, पथराव, आगजनी शुरू हो गई। देखते ही देखते पूरा शहर जल उठा था।

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दंगे में दर्ज हुई थीं 169 एफआईआर
जानकार बताते हैं दंगे में कई लोग मारे गए थे। इस दंगे में करीब 169 मुकदमे दर्ज किए गए थे। इसमें तीन एफआईआर पुलिस की ओर से दर्ज कराई गई थीं।
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