वायरल बुखार ने शहर और देहात क्षेत्र के अधिकतर गांवों को चपेट में ले लिया है। वायरल पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी बेबस नजर आ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में फिजीशियन नहीं होने से मरीज निजी अस्पताल और झोलाछाप डाक्टरों की शरण में जाने को मजबूर हैं। जिला अस्पताल में ओपीडी खुलने से पहले ही मरीजों की लाइनें लग रही हैं।
पिछले एक पखवाड़े से मुरादाबाद शहर और अधिकतर ब्लाकों में वायरल बुखार ने कहर बरपाया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग बुखार से पस्त पड़े हैं। हर परिवार में कोई न कोई बुखार से पीड़ित है। झोलाछाप डाक्टरों से इलाज करवाने में कई मरीज जान भी गवां चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सामुदायिक केंद्रों को प्रभावित इलाकों में प्रतिदिन दो-दो स्वास्थ्य कैंप लगाने के आदेश दिए हैं। अधिकतर केंद्रों पर फिजीशियन नहीं हैं, जिसके चलते सीएमओ के कैंप लगाने के आदेश हवाई साबित हुए हैं। सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्थाएं लड़खड़ाने से निजी अस्पताल मरीजों से पैक हैं। झोलाछाप भी चांदी काट रहे हैं। झोलाछाप अपनी दुकानों में मरीजों को भर्ती कर ग्लूकोज तक चढ़ा रहे हैं।
जिला अस्पताल का बुरा हाल है। अस्पताल की ओपीडी खुलने से पहले ही मरीजों की कतारें लग रही हैं। ओपीडी के तीन काउंटर हैं। सभी काउंटरों पर सुबह सात बजे से कतार लगनी शुरू हो रही है। आठ बजे ओपीडी खुलने से लेकर दोपहर दो बजे तक मरीज भटक रहे हैं। आईपीडी में बेड खाली नहीं हैं। गंभीर मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार के मुताबिक मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इस महीने आखिर तक यही स्थिति रहेगी। डेंगू, मलेरिया की आशंका से पैथोलॉजी लैब में खून की जांचों का दबाव दोगुने से अधिक पहुंच गया है।