मुरादाबाद। यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने के लिए एक इंटर कालेज की महिला क्लर्क को तीन दिन से रोज 50 किलोमीटर दूर संकलन केंद्र पर भेजा जा रहा है। जबकि इस विद्यालय में पांच पुरुष शिक्षक और कर्मचारी हैं। अफसरों ने इसे नियमों की अनदेखी मानते हुए जांच बैठा दी है। जेडी ने तो डीआईओएस को पत्र भेजकर सप्ताह भर में रिपोर्ट देने को कहा है। मामला बिजनौर जनपद के कन्या इंटर कालेज का है। बिजनौर जनपद की चांदपुर तहसील क्षेत्र के गांव लुहारपुरा में स्थित है राजकीय कन्या इंटर कॉलेज। इस विद्यालय में दो पालियों में परीक्षाएं कराई जा रही हैं। इस विद्यालय की एक महिला क्लर्क अंजू चौहान को 18 फरवरी से रोज पहली पाली की परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को जमा करने के लिए पचास किलोमीटर दूर बिजनौर के राजकीय इंटर कालेज में बनाए गए संकलन केंद्र पर भेजा जा रहा है। यह स्थिति तब है जब इस कॉलेज में पांच पुरुष शिक्षक और कर्मचारी हैं। इनमें एक शिक्षक, तीन वोकेशनल शिक्षक और एक बड़े बाबू हैं।
बावजूद इसके अंजू चौहान अकेले रोज उत्तर पुस्तिकाओं के दो बड़े बंडल लेकर बिजनौर जाती हैं। नियमों के अनुसार अगर किसी महिला कर्मी को बंडल ले जाने के लिए लगाया जाता है तो साथ में किसी पुरुष स्टॉफ को भी होना चाहिए। जब शिकायत गूंजी तो जांच बैठा दी गई।
अंजू चौहान ने भी जेडी को पत्र भेजा है। जिसमें कहा है कि हमारे विद्यालय में करीब 400 विद्यार्थियों का परीक्षा केंद्र बनाया गया है। प्रधानाचार्य ने लिखित में आदेश निकाला, जिसमें मेरी ड्यूटी पहली पाली के बंडल वाहक के रूप में लगाई है। विद्यालय से बिजनौर संकलन केंद्र के दूरी करीब 50 किलोमीटर है। जब मैंने अपने साथ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भेजने की मांग की तो उन्होंने इन्कार कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि लिपिक का कार्य भी करना पड़ेगा।
यूपी एजूकेशनल मिनिस्ट्रीयल ऑफिसर्स एसोसिशन के मंडल अध्यक्ष सैयद आसिफ हसन ने कहा कि महिला कर्मचारी को बिना किसी व्यवस्था के संकलन केंद्र पर भेजना नियमों का उल्लंघन है। यदि रास्ते में कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो उसका उत्तर दायित्व प्रधानाचार्य का होगा।