मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सत्ता संभालने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ करने का एलान किया है। तब से ही किसान बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें सही और स्पष्ट जानकारी बैंकों की ओर से नहीं दी जा रही है। इस कारण किसान भटक रहे हैं।
सीएम का सख्त आदेश है कि फसली ऋण लेने वाले किसानों की सूची तैयार की जाए। बैंक किसानों के साथ अच्छा व्यवहार करें और उन्हें सही व पुख्ता जानकारी दी ताकि किसानों को बैंकों के चक्कर न लगाने पड़े लेकिन बैंकों में सीएम के आदेश बेअसर हैं। मुरादाबाद में तकरीबन 2 लाख 82 हजार किसान हैं।
इसमें 86 हजार किसानों ने जिला सहकारी बैंक, पीएनबी, प्रथमा बैंक और गन्ना समितियों से 904 करोड़ रुपये का फसली ऋण लिया था। सरकार ने 31 मार्च 2016 तक ऋण माफ किया है। इस दायरे में केवल 40 हजार किसान आ रहे हैं। बाकी किसान अपने-अपने केडिट कार्ड का नवीनीकरण करा चुके हैं।
जिला सहकारी बैंक और राष्ट्रीय बैंकों में 31 मार्च 2016 तक फसली ऋण जमा न करने वाले किसानों की सूची तैयारी की जा रही है। कर्ज लेने वाले किसान बैंकों में भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें बैंक वाले कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे हैं। जिस कारण किसान बार-बार बैंकों में चक्कर लगा रहे हैं।