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Moradabad News: दस साल बाद मिला परिवार को न्याय, इंश्योरेंस कंपनी और अस्पतालों पर लगाया जुर्माना

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मुरादाबाद। बदायूं के एक परिवार को उपभोक्ता अदालत से करीब दस साल बाद न्याय मिला है। अदालत ने अस्पताल के चिकित्सकों और इंश्योरेंस कंपनी पर 14 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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बदायूं जनपद के बिसौली के रहने वाले दीपक गुप्ता ने उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम की अदालत में 30 सितंबर 2015 को वाद दायर किया था। जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी रेखा गर्भवती थी। संभल के संमंगलम अस्पताल की डॉ. शिखा अग्रवाल इलाज कर रही थीं। 4 नवंबर 2014 की देर शाम रेखा की तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती करा दी। डॉ. शिखा अग्रवाल ने कहा कि डिलिवरी ऑपरेशन से हो पाएगी। आप रुपये जमा कर दीजिए। तब दीपक ने आठ हजार रुपये जमा कर दिए थे। जिसके बाद डाक्टर ने ऑपरेशन कर दिया था। ऑपरेशन के बाद रेखा की तबीयत खराब होने लगी थी, तब डाक्टर शिखा ने मुरादाबाद स्थित श्री साईं अस्पताल में इलाज के लिए रेफर कर दिया था, जहां डाॅक्टर ने बताया कि ऑपरेशन गलत हुआ है। इनकी नस कट चुकी है। जिस कारण से ब्लड नहीं रुक रहा है। दो दिन तक श्री साईं अस्पताल में भर्ती रहने के बाद यहां से भी रेखा को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया और दीपक से 70 हजार रुपए भी ले लिए थे।
दिल्ली में पता चला कि रेखा के शरीर में गलत इलाज के कारण सेप्टिक फैल गया है। जिसे मुश्किल से ही सही किया जा सकता है। 8 नवंबर 2014 को रेखा की मौत हो गई थी। रेखा की मृत्यु के बाद दीपक ने यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी मुरादाबाद और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी मुरादाबाद में रेखा की मृत्यु की जानकारी दी गई थी। पहले से कराए गए बीमा का क्लेम किया। जिसे दोनों ही बीमा कंपनियों ने मृतका के कागजातों को गलत करार देते हुए बीमा राशि नहीं दी। इस मामले में आयोग प्रथम के अध्यक्ष रमा शंकर और सदस्य रमेश कुमार विश्वकर्मा, रंजना द्वारा दोनों पक्षों को सुना गया। आयोग ने इस मामले में चिकित्सक की गलती को मानते हुए संमंगलम अस्पताल की चिकित्सक डॉ. शिखा अग्रवाल और यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस मुरादाबाद पर आठ लाख रुपये के अलावा श्री साईं अस्पताल मुरादाबाद के प्रबंधक और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुरादाबाद को दोषी मानते हुए छह लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही आदेश दिया है परिवादी को दस हजार रुपये वाद व्यय के भी दिलाए जाएं। संपूर्ण राशि एक माह के भीतर जमा करने के आदेश दिए गए हैं। वहीं इस मामले में साईं अस्पताल के संचालक डॉ. वीके गोयल का कहना है कि मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। यह कब का केस है इसके बारे में भी जानकारी नहीं है।
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