मुरादाबाद। निष्क्रिय औद्यानिक उत्पादन एवं विपणन संघ मुरादाबाद के फर्जी पदाधिकारी बन आरोपियों ने कृषि विभाग से लाइसेंस हथिया कर न सिर्फ खुद उर्वरक बिक्री का काम किया बल्कि दो शिक्षित बेरोजगार युवकों को 50-55 हजार रुपये में लाइसेंस बेचने का काम भी किया। डीएचओ द्वारा चार माह पहले की गई एक जांच में भी इस तरह का एक मामला सामने आ चुका है। लेेकिन इसके बाद भी आरोपियों पर आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
औद्यानिक उत्पादन एवं विपणन संघ मुरादाबाद का निबंधन वर्ष 2004 में हुआ था। जिसके अध्यक्ष व सचिव क्रमश: रफीउद्दीन व असदअली हैं। निबंधन के बाद इसकी कुछ सदस्य समितियां संभल व अमरोहा में चली गईं। इसके अलावा निबंधन के बाद से आज तक इस संघ का चुनाव नहीं हुआ है और न ही इस समिति के पदाधिकारियों द्वारा कोई व्यवसाय ही किया गया। इस समिति का खुद को अध्यक्ष बताने वाले रफीउद्दीन ने शिकायत की है कि शादाब नाम के एक व्यक्ति ने वर्ष 2017 में निष्क्रिय संघ को अपना बताते हुए उर्वरक लाइसेंस के लिए आवेदन किया। उनको जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इसकी शिकायत जिला कृषि अधिकारी से की। इस पर डीएओ ने डीएचओ कार्यालय से रिपोर्ट मांगी। डीएचओ सुनील कुमार ने वर्ष 2017 में ही इसकी रिपोर्ट भेजते हुए अवगत करा दिया था कि यह संघ निष्क्रिय है और इसके वास्तविक अध्यक्ष रफीउद्दीन व सचिव समद हैं। इसके बाद भी आरोपी शादाब चार शिक्षित युवकों को गुमराह करते हुए संघ का अपने को पदाधिकारी बताकर व खालिद व साजिद समेत चार युवकों को सचिव नामित करते हुए जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से उर्वरक बिक्री का लाइसेंस प्राप्त करने में सफल हो गया। जिला उद्यान अधिकारी ने भी इसे अपनी जांच में शामिल किया है। रफीउद्दीन के मुताबिक इसकी शिकायत डीएओ से की। करीब छह माह पहले हुई शिकायत को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी बीच रफीउद्दीन उर्वरक केंद्र संचालित कर रहे युवकों से मिला। रफीउदद्ीन का दावा है कि वह जब इन लोगों से मिला तो उन्होंने बताया कि शादाब नाम के एक व्यक्ति से यह लाइसेंस 50-50 हजार रुपये में खरीदा था। पीड़ितों ने तत्कालीन एसएसपी को भी आरोपी के खिलाफ तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने उसमें फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी। मामला संज्ञान में आने के बाद जब डीएचओ ने इसकी जांच की तो भी दो युवकों को 50-50 हजार रुपये लेकर लाइसेंस बेचने की पुष्टि हुई। तब जाकर वह लाइसेंस निरस्त हो सका था। लेकिन फर्जी पदाधिकारी बन लाइसेंस बेचने वाले युवक पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
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प्रति बोरी एक से दो रुपये कमीशन भी लेता था आरोपी
50 हजार रुपये में लाइसेंस शादाब नाम के युवक से लाइसेंस खरीदने की बात कहने वाले युवक ने बताया कि आरोपी उन लोगों से उर्वरक की प्रति बोरी पर एक से दो रुपये कमीशन भी लेता था। पीड़ित युवक का कहना है कि उसके जैसे गांव के कई भोले-भाले गरीब लड़कों से उर्वरक लाइसेंस के नाम पर ठगी की गई है।