दसवीं मुहर्रम पर शहर में ताजियों का जुलूस निकाला गया। जुलूस में गली मोहल्लों से छोटे-बड़े तकरीबन 215 ताजिये शामिल हुए। इसमें कंबल का ताजिया, पंखे का ताजिया, सरसों का ताजिया प्रमुख रहे। जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ कर्बला दससराय चौकी पहुंचा। इस दौरान शहादतनामे और मर्सिए के दौर चलते रहे। जहां गमगीन माहौल में ताजिये दफन किए गए। आखिर में शहर के ताजियों का सदर कंबल के ताजिया दफन किया गया।
इसके पूर्व शहर में कई जगह जिक्र-ए-शहादत में दसवीं मुहर्रम की जानकारी दी गई। बताया गया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की अजीम शहादत की यादगार आज दुनिया भर में मनाई जाती है। भले ही नवासे रसूल का रोजा इराक के कर्बला में है, लेकिन हर शहर में आज कर्बला मौजूद है। सच्चाई की जीत का पैगाम है यह अलम और ताजिये। आज हर कोई खुद को हक का परस्तार और हुसैनी बताता है।
हूरों की सलामी से उठा ताजियों का सरदार
- दसवीं मुहर्रम पर ताजियों के जुलूस का आगाज कंबल के ताजिये से हुआ। मोहल्ला पीरगैब से निकली हूरों की जोड़ी की सलामी के बाद डीएम अनुज सिंह और एसएसपी सतपाल अंतिल ने कंबल के ताजिये को उठाकर अकीदतमंदों के कंधों पर रखा। इसके बाद शहर में ताजियों के उठने का सिलसिला शुरू हो गया। इस दौरान सांसद रुचिवीरा, पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन, देहात विधायक नासिर कुरैशी, सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव, सलीम वारसी, सलाउद्दीन मंसूरी, नईम चिश्ती आदि मौजूद रहे।
ताजिये के नीचे से निकलकर मांगी मन्नत
- कंबल के ताजिए के उठने के साथ ही जियारत के लिए होड़ सी मच गई। ताजिये के नीचे से निकलकर लोगों ने मन्नत मांगी। ताजिए को शौकत बाग में ले जाकर रखा गया। जहां इसकी जियारत के लिए महिलाएं छतों पर पहले से मौजूद रही। महिलाओं ने छतों से कंबल के ताजिए पर चावल, पैसा, कलावा आदि बरसा कर जियारत की।