जुलस में शामिल शिया अजादार। अमर उजाला
मुरादाबाद। यौमे आशूरा पर शहर की तंग गलियों से कर्बला तक या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रही। हर ओर जिक्र-ए-शहादत। हर आंखें नम और हर चेहरे पर हजरत इमाम हुसैन का गम। कुछ ऐसे माहौल में मंगलवार को शहर से लेकर गांव तक दसवीं मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। देर रात गमगीन माहौल में ताजियाें को कर्बला में दफन किया गया।
शहर में कई जगह जिक्र-ए-शहादत में दसवीं मोहर्रम का वाक्या बयान किया गया। मौलाना ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की अजीम शहादत की यादगार आज दुनिया भर में मनाई जाती है। भले ही नवासे रसूल का रोजा इराक के कर्बला में है, लेकिन हर शहर में आज कर्बला मौजूद है। अलम और ताजिये सच्चाई की जीत का पैगाम हैं। आज हर कोई खुद को हक का परस्तार और हुसैनी बताता है। कर्बला की शहादत ने इस्लाम को नई रोशनी बख्शी।
शहर में अकीदत और एहतराम के साथ ताजियों का जुलूूूस निकाला गया। जुलूस में गली मोहल्लों से निकले छोटे-बड़े तकरीबन दो सौ से ताजिये शामिल हुए। इसमें कंबल का ताजिया, पंखे का ताजिया, सरसाें का ताजिया प्रमुख रहे। शहादतनामे और मर्सिए पढ़ते हुए लोेग कर्बला तक पहुंचे। जहां गमगीन माहौल में ताजियों को दफन किया गया। आखिर में शहर के ताजियों का सरदार कंबल का ताजिया को दफन किया गया।