मुरादाबाद। कुछ लोग जिंदगी में जो सीख देते हैं वो उनकी मौत के बाद भी रास्ता दिखाती है। चंद्रनगर के 65 वर्षीय खजान सिंह उन्हीं में से एक थे। बीते रविवार को सांड़ के हमले में उनकी मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया था लेकिन अब वही नाम इंसानियत और उम्मीद की मिसाल बन गया है। खजान सिंह ने अपनी मौत के बाद भी किसी और की जिंदगी रोशन कर दी है।
दरअसल खजान सिंह ने जीवनकाल में ही नेत्रदान का संकल्प पत्र भर रखा था। उनके निधन के बाद परिवार ने उनके इस वादे को पूरा किया। बेटे राजेंद्र सिंह ने बताया कि पिता ने हमेशा कहा था जिस दिन मैं न रहूं मेरी आंखें किसी और की दुनिया में उजाला करें। उनकी इस बात को याद रखकर परिवार ने निधन के बाद सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान को सूचना दी। संस्थान की टीम खजान सिंह के घर पर पहुंची और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। डॉक्टरों के अनुसार खजान सिंह की आंखों से दो लोगों को रोशनी मिल गई है।
राजेंद्र बताते हैं कि उनके पिता का जीवन हमेशा सादगी, दया और सेवा से भरा रहा। वह हर सुबह घर से दुकान निकलते समय रोटियां लेकर जाते थे। जो भी जानवर रास्ते में मिलता उसे वह रोटियां खिलाते थे। जिस सांड़ ने हमला कर उनकी जिंदगी छीन ली उस सांड़ को भी उन्होंने रोटियां खिलाई थी। लेकिन उन्हें कोई गिला नहीं क्योंकि होनी को कोई टाल नहीं सकता था। उनके पिता का दिल हर जीव के लिए दुआओं से भरा था।
खजान सिंह के निधन के बाद उनके परिवार ने उनका वादा निभाया। राजेंद्र के अनुसार पिता से प्रेरणा लेकर ही उनकी मां सुरेंद्र कौर और उन्होंने खुद नेत्रदान का प्रण लिया है। राजेंद्र बताते हैं कि उनके पिता का मानना था कि इंसान मरता है लेकिन उसके कर्म हमेशा जिंदा रहते हैं। इसलिए पूरे परिवार ने पहले से ही नेत्रदान का संकल्प ले रखा है। सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान की चेयरपर्सन डॉ. आशी खुराना ने बताया कि खजान सिंह का नेत्रदान पूरी तरह सफल रहा है। उनकी आंखों से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को रोशनी मिल गई है। ऐसे उदाहरण समाज में उम्मीद जगाते हैं। अगर हर व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प ले तो कई लोगों का अंधकार मिट सकता है।