मुरादाबाद। नई दिल्ली के चेंबर ऑफ कॉमर्स में भारत व अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पर वार्ता हुई। मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यातकों की ओर से इसमें यस के चेयरमैन जेपी सिंह ने प्रतिभाग किया। उन्होंने मुरादाबाद समेत देश का आंकड़ा रखते हुए कहा कि टैरिफ से चार करोड़ लोग प्रभावित होंगे, जो सीधे या परोक्ष रूप से हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े हैं।
हस्तशिल्प क्षेत्र देरभर में लगभग 70 लाख कारीगरों को रोजगार देता है। मुरादाबाद में पीतल और धातु के काम में पांच लाख से अधिक कारीगर जुड़े हैं। भदोही के कालीन बुनाई में लगभग 2.2 लाख कारीगर हैं। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर के ब्लू पॉटरी, वुडक्राफ्ट, ब्लॉक प्रिंटिंग और पेंटिंग में छह लाख कारीगरों की मेहनत शामिल होती है। वाराणसी में हजारों बुनकर कालातीत बनारसी साड़ी परंपरा को बनाए हुए हैं। इस तरह उन्होंने टैरिफ का विरोध किया।
जेपी सिंह के साथ मुरादाबाद से बाइंग एजेंट एसोसिएशन की तानिया भाटिया भी इस बैठक में आमंत्रित थीं। यस के चेयरमैन ने बताया कि बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल, नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रो. राकेश मोहन और अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि गूगल, मेटा, क्लाउड सर्विसेज का भारत सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है। इसके बदले अमेरिका को अच्छा सुविधा शुल्क हमारे देश से मिल रहा है, फिर टैरिफ की बात कहां तक जायज है।