मुरादाबाद। बैंकों के विलय होेने के कारण एडी कोर्ड और आईएफएससी कोड बदल गए हैं, जिससे अब निर्यातकों का जीएसटी और आईजीएसटी रिफंड का पैसा फंस गया है। इसमें अकेले मुरादाबाद के निर्यातकों का ही चार सौ करोड़ से अधिक का रिफंड फंसा है, जिससे काफी नुकसान हो रहा है। इसको लेकर बुधवार को कस्टम उपायुक्त मनोज प्रभाकर ने निर्यातकों के साथ बैठक की और इस पर चर्चा की।
कस्टम उपायुक्त के साथ बैठक में यस और एमएचईए के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यस के चैयरमैन विशाल अग्रवाल, करन दुग्गल, एमएचईए के अध्यक्ष नवेद उर रहमान, यस के इंस्टिट्यूशनल सदस्य अनुराग थापन आदि शामिल रहे। निर्यातकों ने कुछ बैंकों का आपस में विलय होने की वजह से कई निर्यातकों के एडी कोड व आईएफएससी कोड बदल जाने की वजह से जीएसटी और आईजीएसटी रिफंड फंस जाने की समस्या प्रमुखता से उठाई। उपायुक्त मनोज प्रभाकर ने सलाह दी कि यदि किसी निर्यातक के बैंक का किसी अन्य बैंक में विलय हुआ है ऐसे में वह अपना एडी कोड चेक कर लें और यदि इसमे कोई परिवर्तन हुआ है तब उसको सही कराकर विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कराएं। उन्होंने सभी की सुविधा और जानकारी के लिए निर्यातकों की लिस्ट दी। प्रत्येक लिस्ट के अंत में उस समस्या का समाधान भी कस्टम विभाग द्वारा बताया गया है। कस्टम उपायुक्त ने बताया कि उनके प्रयासों के कारण आज मुरादाबाद में ड्रा बैक की लिस्ट समाप्त हो चुकी है। यस चैयरमेन विशाल अग्रवाल ने इस संबंध में सीएचए आदि से भी मदद लेने का सुझाव निर्यातकों को दिया।
रिफंड फंसने के विरोध में होगा शांति मार्च : अवधेश
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के महासचिव अवधेश अग्रवाल ने कहा है कि सिर्फ मुरादाबाद में ही एमईआईएस का चार सौ से करोड़ से अधिक रिफंड की धनराशि फंसी है। डीजीएफटी व फाइनेंस मिनिस्ट्री एक्सपोर्टर्स को निचले स्तर पर करने पर लगे हैं। आज तक ऑन लाइन पोर्टल एमईआईएस लाइसेंस 2019-20 और 2020-21 के लिए अभी तक नहीं खोला गया है। छोटा निर्यातक खत्म होने की कगार पर है। सरकार की ओर से बजट न होने की बात कही जाती है। ऐसे में निर्णय लिया गया है कि सभी निर्यातक मिलकर जल्द ही प्रधानमंत्री निवास शांति मार्च निकालेंगे।