मुरादाबाद। नवंबर महीने से कच्चे माल की औसतन कीमतें 25 फीसदी तक बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर हस्तशिल्प कारोबार पर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी से आर्टिजंस के पांव उखड़ गए हैं। कारखाने बंद होने लगे हैं। उद्यमियों का कहना है कि यदि कच्चे माल पर कीमतें न घटीं तो आठ हजार करोड़ का निर्यात खत्म हो जाएगा और इससे जुड़े तीन लाख हस्त शिल्पी बेरोजगार होने की कगार पर आ जाएंगे।
महानगर में पीतल, तांबा, निकिल, एल्युमीनियम, स्टील और लोहा धातुओं से विभिन्न वस्तुएं बनाई जाती हैं। महानगर से लेकर जिले के गांवों तक में उद्योग स्थापित हैं। हस्तशिल्प का हर साल आठ हजार करोड़ तक का निर्यात होता है। कोरोना महामारी के कारण लॉक डाउन के दौरान कारखानों में काम बंद हो गया था। वहीं आर्डर भी रुक जाने से उद्योग और निर्यात प्रभावित हुआ। अब काम ने गति पकड़नी शुरू की तो कच्चे माल पर महंगाई की मार शुरू हो गई। नवंबर से अब तक कच्चे माल पर औसतन 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। पिछले दस दिनों में कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होने के कारण उद्यमियों और निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। निर्यातकों ने कारखाने वालों को जो आर्डर दिए थे, उसमें 25 प्रतिशत तक कच्चे माल पर बढ़ोतरी होने के कारण इन लोगों को काम ही बंद करना पड़ रहा है। कारखानों में बंदी का सिलसिला शुरू होने से हस्त शिल्पियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
दुबई सहित पूर्व मध्य के देशों से होता रहा आयात
मुरादाबाद में निर्यात उत्पादों को तैयार किया जाता है। इसके लिए दुबई सहित पूर्व मध्य के देशों से रॉ मैटेरियल आयात किया जाता है। जानकार बताते हैं कि पूर्व मध्य के देशों में अब स्थितियां काफी बदल गई हैं। इससे कच्चे माल के आयात पर भी प्रभाव पड़ा है। यही हाल रहा तो कच्चे माल की कीमतों में और बढ़ोत्तरी हो जाएगी।
नवंबर और फरवरी के दामों में आ गया काफी अंतर
धातु - नवंबर (रु.प्रति किलो) - फरवरी (रु.प्रति किलो) - बढ़ोतरी (प्रति. में)
पीतल - 330 - 440 - 33.3
कॉपर - 523 - 690 - 32
एल्युमीनियम - 150 - 178 - 18.60
निकिल - 1210 - 1500 - 24
सीआर शीट - 58 - 72 - 24
स्टेनलेस स्टील- 122 - 152 - 25
प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के रीजनल कोआर्डिनेटर अवधेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और कॉमर्स मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि लॉक डाउन के बाद से निर्यातक निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एमईआईएस स्कीम के तहत सात प्रतिशत तक सब्सिडी दी थी, जो 31 दिसंबर 2020 से बंद कर दी गई, जिससे निर्यातक सदमे में हैं। क्योंकि धन की कमी बताकर एक अप्रैल 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक की सब्सिडी निर्यातकों को नहीं दी गई है। यदि कच्चे माल की कीमतो पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया गया व एमईआईएस का निर्यातकों का पैसा तुरंत नहीं दिया गया तो मुरादाबाद से होने वाला आठ हजार करोड़ का निर्यात खत्म हो जायगा। कहा कि हस्तशिल्प निर्यात से जुड़े तीन लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं।