मुरादाबाद। कैनरा बैंक का दस करोड़ रुपये का ऋण नहीं चुकाने पर बैंक अधिकारियों ने बुधवार को महानगर की एक निर्यात फर्म को सील कर दिया है। कैनरा बैंक के चीफ मैनेजर सर्वेश गौतम के अनुसार जिलाधिकारी ने 2014 में ही इस फर्म को सील करने के आदेश दिए थे। लेकिन फर्म मालिक के हाईकोर्ट चले जाने की वजह से मामला अभी तक अटका था। हाईकोर्ट से बैंक के पक्ष में आदेश होने के बाद बैंक ने बुधवार को यह कार्रवाई की।
कैनरा बैंक की कानूनी सलाहकार टीम में शामिल अधिवक्ता शाहिद ने बताया कि 2004 में लिए गए दस करोड़ के ऋण में लसाले प्रोडक्टस इंडिया लिमिटेड की संपत्ति बंधक थी। इसमें ब्रास की मैन्यूफैक्चरिंग का काम होता है। मुरादाबाद में इतने बड़े ऋण को देने का अधिकार नहीं होने की वजह से लखनऊ की एआरएम शाखा से ऋण दिया गया था। ऋण चुकता नहीं होने की वजह से खाता एनपीए घोषित हो गया था। बैंक की धनराशि वापस लेने के लिए जिलाधिकारी ने आठ सितंबर 2014 को संपत्ति सील करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन न्यायालय में मामला लंबित होने की वजह से कार्रवाई में देरी हुई है। कैनरा बैंक से ही जुड़े अधिवक्ता एसके सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर सरफेसी एक्ट धारा 14 के अंतर्गत कार्रवाई हुई है। इसी 10 करोड़ के ऋण में मुरादाबाद के अलावा कानपुर में हाइड इंटरनेशनल के नाम से संपत्ति भी बंधक थी। उसे करीब छह महीने पहले सील किया था। पुलिस की मौजूदगी में बैंक अधिकारियों की टीम ने बुधवार को इस फैक्टरी को सील कर दिया। सील करने वाली टीम में शिवेंद्र सिंह, शाहिद, एसके सिंह, एसीएम प्रथम, प्राधिकृत अधिकारी चीफ मैनेजर विश्वजीत गुप्ता, एआरएम शाखा लखनऊ से सर्वेश गौतम आदि थे।
हमारे साथ फ्राड हुआ है...
सील होने वाली फर्म के मालिक अहले इलाही ने कहा कि कैनरा बैंक ने किसी अन्य के साथ मिलकर फ्राड किया है उनका फर्म का नाम आट वर्ल्ड है। उन्होंने कहा कि ऋण का हमसे कोई ताल्लुक नहीं है। बैंक ने 20 साल पहले किसी को ऋण दिया होगा। यह संपत्ति हमारी है और हमने कोई ऋण नहीं लिया है। यहां पर फैक्टरी के अलावा परिवार भी रहता है। सील करने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया है। यह संपत्ति हमने 30 वर्ष पहले खरीदी थी। जिस व्यक्ति के ऋण की बात बैंक कर रही है, उसके बाद हम इस संपत्ति के चौथे खरीदार हैं। इसके विरुद्ध न्यायालय जाएंगे।