फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुरादाबाद: सरकारी अस्पतालों से रूठा प्रसूताओं का भरोसा, पांच साल में प्रसव 40 से घटकर 17.8 फीसदी

Mon, 05 Oct 2026 01:08 PM IST
Vimal Sharma अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

पांच साल में मुरादाबाद जिले में संस्थागत प्रसव 80.3 से बढ़कर 88.5 फीसदी हुआ, लेकिन सरकारी अस्पतालों में प्रसव 40 से घटकर 17.8 फीसदी रह गया। निजी अस्पतालों में प्रसव बढ़ने के साथ सिजेरियन भी 22.5 से बढ़कर 39.7 फीसदी हो गया।
विज्ञापन
जिला अस्पताल मुरादाबाद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मुफ्त दवाएं, मुफ्त जांच और सुरक्षित प्रसव के बाद भी सरकारी अस्पतालों की चौखट से अब प्रसूताओं का भरोसा रूठने लगा है। स्वास्थ्य महकमे के दावों को धता बताते हुए प्रसूताएं अब महंगे निजी अस्पतालों की शरण ले रही हैं। जिलेभर में प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है लेकिन सरकारी अस्पतालों से प्रसव कराने का भरोसा तेजी से घटा है।

विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के हालिया आंकड़ों के मुताबिक यह बड़ा बदलाव सामने आया है। पांच साल में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 80.3 से बढ़कर 88.5 फीसदी हो गया लेकिन सरकारी अस्पतालों में होने वाले प्रसव 40 फीसदी से घटकर सिर्फ 17.8 फीसदी रह गए।

यानी अस्पताल में होने वाले प्रसव में सरकारी अस्पतालों की हिस्सेदारी आधे से भी कम हो गई। वर्ष 2019-21 और वर्ष 2023-24 के आंकड़ों की तुलना में यह बदलाव साफ दिखाई देता है। निजी अस्पतालों में प्रसव का प्रतिशत 39.7 फीसदी दर्ज हुआ है। वहीं कुल संस्थागत प्रसव 88.5 फीसदी हैं।
विज्ञापन


इससे संकेत मिलता है कि अस्पताल में प्रसव कराने का चलन तो बढ़ा लेकिन सरकारी संस्थानों की हिस्सेदारी उस गति से नहीं बढ़ सकी। प्रसव के तरीके में भी बड़ा अंतर सामने आया है। जिले में कुल प्रसव में सिजेरियन की हिस्सेदारी 39.7 फीसदी पहुंच गई है, जबकि चार साल पहले तक यह 22.5 फीसदी थी।

पांच साल में सिजेरियन प्रसव में 17.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का आंकड़ा 53.4 फीसदी है। इसके उलट सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सिजेरियन प्रसव 11.3 फीसदी रहे। गर्भावस्था के दौरान पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 73.7 से घटकर 70.8 फीसदी रह गया।

मां और बच्चे की देखभाल से जुड़े कुछ संकेतक भी घटे हैं। प्रसव के बाद नवजात को टिटनेस से सुरक्षा मिलने का आंकड़ा 95.1 से घटकर 92.3 फीसदी और मां-बच्चे को मिलने वाले एमसीपी कार्ड का कवरेज 97.6 से घटकर 91.6 फीसदी हुआ है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव बढ़ाने के लिए टीम को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में इसके परिणाम भी सामने आए हैं। अधिकांश लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा होना व निजी अस्पतालों की संख्या ज्यादा होना भी इसका कारण है। हमारा प्रयास है कि सभी प्रसव अस्पतालों में हों। एक भी प्रसव घर पर न हो। -डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ
विज्ञापन

अप्रैल से अगस्त 2026 तक सरकारी व निजी अस्पतालों में हुए प्रसव 
ब्लॉक सरकारी अस्पताल निजी अस्पताल
बिलारी 738 395
भोजपुर 814 841
डिलारी 688 847
कांठ 438 973
कुंदरकी 449 623
मूंढापांडे 878 730
ताजपुर 508 441
ठाकुरद्वारा 686 545
मुरादाबाद शहर 1,099 16,734
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें