मुरादाबाद। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों से अब विवेचक या और अन्य कोई पुलिस कर्मी छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा। साक्ष्य संकलन के 24 घंटे के भीतर ही पुलिस उसका पूरा डाटा सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) पोर्टल पर अपलोड कर रही है। साक्ष्यों के डिजिटल बैकअप भी तैयार किए जा रहे हैं। एफएसएल लखनऊ द्वारा तैयार एसओपी का उद्देश्य साक्ष्य संकलन, संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और समयबद्ध बनाना है। पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों में भी इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
तीनों नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कई बदलाव किए गए हैं। नए कानून में सिपाही से लेकर अधिकारी तक सबकी जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं, चाहे घटनास्थल का निरीक्षण करना हो या फिर आरोपी को हिरासत में लेना हो।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 1796(3) को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस तकनीकी सेवा मुख्यालय ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ (एफएसएल) से एसओपी तैयार कराई गई है। डीजीपी के आदेश पर एसओपी को लागू किया गया है जिसमें सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी फोरेंसिक टीम को मौके पर बुला रहे हैं और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
घटनास्थल स्थल की वीडियोग्राफी, फोटो और अन्य साक्ष्य संकलन कर रहे हैं। इतना ही नहीं 24 घंटे के भीतर उसे सीसीटीएनएस पर भी अपलोड कर रहे हैं। साक्ष्य संकलन का पूरा ब्योरा ऑनलाइन तो अपलोड हो रहा है, साथ ही इसका एक डिजिटल बैकअप भी तैयार किया जा रहा है। मौके से जुटाए गए नमूने लैब भेजे जा रहे हैं। इस तरह एक घटनास्थल के तीन-तीन रिकार्ड तैयार किए जा रहे हैं। पुलिस अफसर बीच-बीच में इसकी निगरानी भी कर रहे हैं। इसके अलावा पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों पर भी इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
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सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामले जैसे गंभीर अपराध, यौन अपराध, आतंकवाद, एनडीपीएस एक्ट, हत्या, पॉक्सो से संबंधित अपराधों में पुलिस और फोरेंसिक टीम घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है। साक्ष्य संकलन का पूरा डाटा सीसीटीएनएस पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। मुरादाबाद मंडल में 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में 24 घंटे के अंतराल में ही डाटा अपलोड कर दिया जाता है।- मुनिराज जी, डीआईजी, मुरादाबाद रेंज
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इस किट के साथ मौके पर पहुंचती है फोरेंसिक टीम
मुरादाबाद। थाना प्रभारी या किसी अन्य सक्षम अधिकारी की सूचना पर फोरेंसिक टीम अपने साथ क्राइम सीन फोरेंसिक किट, डीएनए स्वैब, फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट संकलित करने वाले उपकरण, हाई डेफिनिशन कैमरा, स्मार्ट फोन, टेम्पर प्रूफ पैकेट, डिजिटल साक्ष्यों के लिए फैराडे बैग, चेन ऑफ कस्टडी फार्म लेकर जा रही है। ब्यूरो
घटनास्थल से दस तरह के साक्ष्य जुटाती है टीम
- भौतिक साक्ष्य- हथियार, कपड़े, औजार
- जैविक साक्ष्य- खून, बाल, लार, वीर्य, ऊतक
- फिंगर प्रिंट- दरवाजे, मेटल, हथियार
- फुटवियर, टायर मार्क- मिट्टी, फर्श, जमीन
- दस्तावेज- पत्र, मिट्टी, रजिस्टर
- डिजिटल साक्ष्य- मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क,
-सीसीटीवी-डीवीआर- कैमरा, डीवीआर, नेटवर्क रिकार्डर
- इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस- स्मार्ट डिवाइस, एलओटी, जीपीएस
- ज्वलनशील साक्ष्य- पेट्रोल, शराब, जली वस्तुएं
- मौखिक, सुनाई देने वाले ऑडियो वीडियो- कॉल रिकॉर्डिंग, ऑडियो
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उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी द्वारा जारी की गई एसओपी में बहुत महत्वपूर्ण बिंदुओं को रखा गया है। आधुनिक जांच अधिकारी सच्चाई के प्रति अडिग रहें तो अपराधियों को सजा मिलेगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा। एसओपी में वैज्ञानिक और पारदर्शी साक्ष्य संरक्षित रहेंगे। -अंकित टंडन, अधिवक्ता