किसानों ने डीएम के समक्ष बिजली, गन्ना भुगतान, बैंक और सड़क निर्माण की समस्याएं उठाई। आरोप लगाया कि विद्युत अधिकारी उनकी सुनते नहीं है। डीएम ने अधिकारियों से किसानों की प्रत्येक समस्या का समय से निस्तारण करने के निर्देश दिए।
डीएम मानवेंद्र सिंह ने कलक्ट्रेट सभागार में बुधवार को किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए किसान दिवस का आयोजन किया। इस दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि निजी नलकूप की बिजली मुफ्त देने की घोषणा के बाद भी विद्युत विभाग बिल की वसूली कर रहा है। विद्युत आपूर्ति भी शेड्यूल के अनुसार विभाग की तरफ से नहीं की जा रही है। संबंधित जेई किसानों का फोन भी नहीं उठाते हैं। इस मामले में डीएम ने अधिशासी अभियंता विद्युत को विद्युत बिल के संबंध में जानकारी प्रदान करने के साथ ही जेई की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए।
बिलारी शुगर मिल पर किसानों के गन्ने का 47 करोड़ 67 लाख और बेलवाड़ा पर 17 करोड़ रुपये बकाया रहने पर नाराजगी जताई। डीएम ने इस मामले में जिला गन्ना अधिकारी को भुगतान कराने के लिए कड़े निर्देश दिए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी को रोड ठीक कराने, सिंचाई विभाग को नहरों में पानी छोड़ने और चकबंदी विभाग को चकबंदी वादों का निस्तारण करने के निर्देश दिए।
किसानों से संवादहीनता नहीं होनी चाहिए
डीएम ने स्पष्ट किया कि किसानों से अधिकारियों की संवादहीनता नहीं होनी चाहिए। परस्पर आपसी संवाद बनाए रखना जरूरी है। संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए समस्याओं का समाधान करें, ताकि किसान दिवस की सार्थकता बनी रहे।
किसानों का किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। डीएम ने जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी से जिले में उर्वरक की उपलब्धता के संबंध में जानकारी ली। डीएम ने किसानों से सहकारी समितियों से संबंधित समस्याओं की भी जानकारी ली। किसानों ने बताया कि मूढ़ापांडे सहकारी समिति का गोदाम जर्जर हालत में है। गोदाम टपकने से उर्वरक खराब हो जाते हैं। डीएम ने एआर को-ऑपरेटिव को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।
मूढ़ापांडे क्षेत्र में छुट्टा पशुओं के घूमने की शिकायत पर डीएम ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि क्षेत्र में सर्वे करें और गोशालाओं की क्षमता से अधिक छुट्टा पशु हैं तो नया टीन शेड डलवाएं। किसान दिवस में सीडीओ सुमित यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. अनिल कंसल, जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी, विद्युत, गन्ना, मंडी, सिंचाई, लोक निर्माण विभाग विभाग के अधिकारी और किसान मौजूद थे।