24 जनवरी 2008 में मुरादाबाद के तत्कालीन एसएसपी प्रेम प्रकाश को गरीबों की किडनी खरीदने वाले कुछ लोगों के अक्सर रेलवे स्टेशन पर सक्रिय होने की सूचना मिली थी। इसकी गहराई से जांच की गई तो मेरठ का विद्याराम उर्फ पप्पू पुलिस के संपर्क में आया। विद्याराम ने पुलिस को मेरठ में अपने इलाज की शुरुआत के बाद फरीदाबाद रेफर किए जाने और वहां इलाज के दौरान किडनी निकाले जाने की शिकायत की थी। एसएसपी के निर्देश पर तत्कालीन एएसपी मंजिल सैनी ने पूरे मामले की जांच की। पीड़ितों के बयान दर्ज किए तो पता चला कि मजदूरों को पैसे का लालच देकर उनकी किडनी निकाली जाती थी। फिर उसे मोटी रकम लेकर विदेश के मरीज लोगों को बेच दी जाती थीं। पकड़े गए गिरोह के सदस्यों ने पूछताछ में पता चला था कि वह विदेशी के सैकड़ों मरीजों को भारत बुलाकर किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं लेकिन किन किन लोगों ने किडनी बेची और किन किन मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। अब तक इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है।
फरीदाबाद में पकड़े गए गिरोह से जुडे लोग
मुरादाबाद पुलिस ने मामले की जांच पड़ताल के दौरान फरीदाबाद के अस्पताल में दबिश दी थी। जहां अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट का धंधा चल रहा था। डॉक्टर जरूरतमंदों को रुपये का लालच देकर उनकी किडनी निकालकर अपने मरीजों को ट्रांसप्लांट करता था।
सिपाही ने दलाल से मिलकर रफा दफा कर दिया था मामला
- जिस व्यक्ति की किडनी निकाली गई थी, उसने दोबारा इस मामले में तत्कालीन एसएसपी से शिकायत की थी। तब पता चला कि पीड़ित पहले भी शिकायत कर चुका था, लेकिन जिस सिपाही को जांच सौंपी गई थी, वह दलाल से मिलकर मामले को रफा-दफा कर चुका था।
दिल्ली पुलिस ने पकड़कर छोड़ दिया था गिरोह
मुरादाबाद। तत्कालीन एसएसपी प्रेम प्रकाश ने बताया कि 24 जनवरी 2008 को मैं दफ्तर में शिकायतें सुन रहा था। इसी दौरान मेरे पास एक व्यक्ति आया और उसने बताया था कि रेलवे स्टेशन पर कुछ लोग आते हैं और गरीबों को रुपये देने का लालच देकर उन्हें अपने साथ ले जाकर किडनी निकाल लेते हैं। मैंने एएसपी मंजिल सैनी और एसआई जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में टीम का गठन किया। जांच पड़ताल में कई डॉक्टर और उनके साथी पकड़े गए थे। पूछताछ में पता चला था कि गिरोह दिल्ली में पकड़ा गया था लेकिन तब दिल्ली पुलिस ने आरोपी बिना कार्रवाई के ही छोड़ दिए थे। गिरोह का मुख्य डॉ. अमित कुमार काठमांडू से पकड़ा गया था।