दसवीं की इस छात्रा की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी यह छात्रा बेबस है। उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर है। वह चाहकर भी उठ नहीं सकती। कम से कम अगले डेढ़ महीना उसे इसी हाल में वक्त काटना होगा। उसे इस हालत में पहुंचाने वाला आजाद घूम रहा है।
पुलिस की सरपरस्ती ने उसके गुनाह पर पर्दा डाल दिया है। छात्रा के मां बाप गरीब तबके के हैं। लिहाजा इंसाफ को कागज के टुकड़ों से तोलने की कवायद हो रही है। पुलिस का चेहरा फिर एक बार बेनकाब हो गया है। छेड़छाड़ की शिकार छात्रा के आंसुओं को पुलिस नाटक बता रही है और मनचला थानेदार को मासूूम नजर आ रहा है। मामला अलग - अलग वर्ग का होने की वजह से हिंदू संगठनों में आक्रोश है।
पाकबड़ा में छेड़छाड़ की यह दुस्साहसिक वारदात शुक्रवार को दोपहर दो बजे उस वक्त हुई थी जब दसवीं की ये छात्रा स्कूल की छुट्टी के बाद मंगूपुरा स्थित अपने घर से ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। आए दिन पीछा करने वाले पाकबड़ा के युवक शाहनवाज ने छात्रा से छेड़छाड़ शुरू कर दी थी। मनचले की हरकतें बढ़ने पर छात्रा ने विरोध किया था तो बेखौफ शहनवाज ने उसे बाइक से जोरदार टक्कर मार दी थी।
इस घटना में छात्रा की रीढ़ की हड्डी टूट गई और वह तभी से अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी है। पहले उसे टीएमयू में रखा गया फिर परिजन वाजिद नगर स्थित डा. एसके खान के नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। पाकबड़ा पुलिस तीन दिन तक इस घटना को दबाए रही। छात्रा के घर वालों पर समझौते को दबाव डाला। एसओ पाकबड़ा ने आरोप लगाया कि छात्रा के घर वालों ने आरोपी से पांच हजार रुपये लेकर समझौता कर लिया है।
पाकबड़ा पुलिस की इस करतूत से पीड़ित छात्रा और उसके घर वाले आहत हैं। छात्रा का कहना है कि पुलिस वाले इंसाफ नहीं दिला सकते तो हमारा मजाक भी न उड़ाएं। बहरहाल मामला मीडिया में उछलने के बाद पुलिस ने शहनवाज के खिलाफ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। उधर, 18 फरवरी से छात्रा के बोर्ड एग्जाम शुुरू हो रहे हैं। लेकिन डाक्टर का कहना है कि छात्रा एक - डेढ़ महीने बिस्तर से नहीं उठ पाएगी।