मुरादाबाद। ग्रेटर नोएडा में ईपीसीएच की ओर से आईएचजीएफ दिल्ली मेला ऑटम 13 से 17 अक्तूबर तक आयोजित किया जाएगा। इसके लिए परिषद ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
यह जानकारी बुधवार को नया मुरादाबाद स्थित ईपीसीएच भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। मीडिया से बातचीत में ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने परिषद की निर्यात तथा निर्यातकों के प्रोत्साहन से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की। भविष्य का रूटमैप भी रखा। कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र को आगे बढ़ाने और आधुनिक बनाने के लिए मजबूत योजना पेश की गई है। इसका मकसद भारत को डिजाइन, क्वालिटी, इनोवेशन में मजबूत कर दुनिया का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बनाना है। कारीगरों व निर्यातकों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना भी उद्देश्य में शामिल है।
उन्होंने कहा कि मुरादाबाद में पहला कैश एंड कैरी सेंटर शुरू होने के बाद अब ऐसे और सेंटर खोलने की योजना है। इसके साथ ही हस्तशिल्प क्षेत्र में तकनीक अपग्रेड करने के लिए हैंडीक्रफ्ट टेक्नोलॉजी मिशन और मुरादाबाद ईपीसीएच हाउस में एक थ्री डी स्टूडियो के डेवलपमेंट, जयपुर में टेस्टिंग फैसिलिटी अपग्रेडेशन, जोधपुर में नई टेस्टिंग लैब और अमेरिका, यूरोप में वेयरहाउसिंग, ड्रॉप-शिपिंग मॉडल तैयार करने जैसे कदम योजना में शामिल हैं।
डॉ. खन्ना के अलावा ईपीसीएच के सीओए (कमेटी आफ एडमिनिस्ट्रेशन) के सदस्यों ने भी विभिन्न बिंदुओं पर बात की। अवधेश अग्रवाल ने कहा कि यह सभी पहल क्लस्टर आधारित विकास के लिए बेहद अहम हैं। सलमान आजम ने कहा कि इस पहल से निर्यातकों की अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होगी। रोहित ढल ने कहा कि टेस्टिंग की अच्छी व्यवस्था से क्वालिटी स्टैंडर्ड मजबूत होगा। नावेद उर रहमान ने वेयरहाउसिंग, ड्रॉप-शिपिंग मॉडल आदि के लाभ बताए। राशिम दुग्गल का जोर जागरूकता पर रहा। ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि हमारी रणनीति सिर्फ कागज तक सीमित नहीं है बल्कि उसे लागू करने पर भी पूरा फोकस है।