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Moradabad News: बिजली निगमों के निजीकरण पर अभियंताओं में रोष

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मुरादाबाद। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर कर्मचारी व अभियंता निजीकरण के खिलाफ एकजुट हुए। बुधवार को मुख्य अभियंता कार्यालय पर कर्मचारी, जेई व अभियंता संघ के पदाधिकारियों ने दक्षिणांचल व पूर्वांचल बिजली निगमों के निजीकरण की निंदा की। उन्होंने इसके विरोध में काली पट्टी बांधकर कार्य किया।
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संघर्ष समिति का कहना है कि निजीकरण के टेंडर नोटिस के बाद से ही बिजली कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। वह सड़कों पर उतर रहे हैं। इसी के तहत पश्चिमांचल के कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल हैं। 18 जनवरी तक सभी कर्मचारी, जेई व अभियंता काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इसके बाद आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बुधवार को आयोजित विरोध सभा में वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण के लिए जारी किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट में सारी शर्तें कर्मचारियों के विरोध में लिखी हुई हैं।
हजारों कर्मचारियों को निजीकरण के बाद निजी उद्योग घरानों के भरोसे छोड़ दिया जाएगा। कर्मचारियों को निजी कंपनी की शर्तों पर काम करना होगा या वीआरएस लेकर घर बैठना होगा। एक साल तक बिजली कर्मी निजीकरण के बाद निजी कंपनी में काम करने के लिए बाध्य होंगे। एक साल में जब निजी कंपनी ढर्रे पर आ जाएगी तब उन सभी सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाएगा जो कंपनी के मुताबिक कार्य नहीं करेंगे। इसमें करीब 50 हजार संविदा कर्मियों की नौकरी जाने व 26 हजार कर्मियों की छटनी होने का खतरा है।
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आरोप लगाया कि कर्मचारियों के लिए विरोध को दबाने के लिए पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन लगातार प्रयास कर रहा है। समिति ने कहा कि यदि प्रबंधन यह समझता है कि बिजली कर्मियों को डराकर निजीकरण थोपा जा सकता है तो यह गलत फहमी है। विरोध सभा में प्रणव चौधरी, प्रेम प्रकाश सिंह, दीपक सिंह, श्रीकांत, यशपाल सिंह, संजय शर्मा, रोहित शर्मा आदि मौजूद रहे।
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