सेलरी के लिए बैंकाें की कतार में ख्ाड़े रहे लाेग
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सत्तर के दशक में किशोर कुमार की गाया गाना खुश है जमाना आज पहली तारीख है जी पहली तारीख है...जबरदस्त हिट हुआ था। इसमें किशोर कुमार पहली तारीख को सैलरी आने पर घर के खुशनुमा माहौल को गाने में प्रस्तुत करते हैं। लेकिन आज स्थिति उलट थी। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी खाते में तो आ गई, लेकिन घरों में पैसा नहीं आने से उत्साह का माहौल दिखाई नहीं दिया। कारण खाते से पैसा निकालने के लिए लाइन में लगने का झंझट भी शुरू हो गया। पैसा है पर खर्च नहीं कर पाएंगे।
सोमवार को नौकरीपेशा लोगों के मोबाइल पर खाते में सैलरी आने का मैसेज आना शुरू हो गया। मैसेज देखकर लोगों में वो उत्साह नहीं था जो अन्य महीनों में हुआ करता था। मैसेज पढ़कर बस इतना देखा कि कितने रुपये आए हैं। पिछला महीना तो जैसे तैसे कट गया, लेकिन इस महीने से फिर से वही परेशानी।
घर के जरूरी सामान की लिस्ट तो तैयार हो गई है और सामान लाना भी जरूरी है। असली परेशानी ये है कि सामान कैसे लाएं। पैसे निकालने के लिए बैंकों के बाहर पहले ही लंबी लंबी लाइन लगी हुई है। अगर कार्यालय से छुट्टी लेकर भी जाएं तो गारंटी नहीं कि वेतन मिल ही जाएगा। अब लोग हालत सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। जब पैसा नहीं है तो सामान कैसे आएगा।
अलग से नहीं लगी वेतनभोगियों की लाइन
सरकार की ओर से आदेश दिया गया था कि बैंकों में वेतनभोगियों के लिए अलग से लाइन लगवाई जाएगी। लेकिन मुरादाबाद की किसी बैंक में ऐसी कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दी। जिस प्रकार से सामान्य दिनों में लाइन लगाई जाती हैं वैसी ही लाइनें एक दिसंबर को भी दिखाई दी।
एसबीआई का एटीएम बंद होने पर हंगामा
एसबीआई मुख्य ब्रांच का एटीएम भी जवाब दे गया। जिसके चलते लाइन में लगे लोगाें ने हंगामा कर दिया। हंगामे के बाद लोगों का मुश्किल से समझाया गया। देर शाम एटीएम में फिर से कैश भरवाया। कैश दोबारा भरते ही एटीएम पर फिर से लंबी लंबी लाइन लग गई। इसके बाद देर रात तक एटीएम से कैश निकाला गया।