नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास ने बेशक पर्वतारोही रवि की मौत की पुष्टि कर दी हो, लेकिन उनके घर वाले इसे मानने को तैयार नहीं हैं। रवि के पिता और मां के साथ ही पूरे परिवार का कहना है कि उनका बेटा जिंदा है और जल्द लौट आएगा।
रवि की मौत की खबर के बाद जहां एक ओर लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देनी शुरू कर दी हैं वहीं परिजन पूरे यकीन से बेटे के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि पर्वतारोहण आयोजक अरूण ट्रेक्स और दूतावास के अधिकारी उन्हें गुमराह कर रहे हैं। जिस शव के मिलने की बात कही जा रही है उसकी पहचान नहीं हो सकी है।
पर्वतारोही रवि कुमार के बड़े भाई मनोज कुमार का कहना है कि शनिवार को दिन में रवि ने 1:28 बजे माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। जिसकी सूचना उन्हें कंपनी की ओर से मिली थी। इसके बाद रविवार को करीब तीन बजे कंपनी के अधिकारी शिवांग का फिर फोन आया कि रवि का उनसे संपर्क टूट गया है।
सोमवार को कंपनी फोन आया कि एक शव मिला है। मनोज ने शव को निकालकर पहचान करने को कहा तो कंपनी ने इसके लिए उनसे 35 लाख रुपये की मांग की। इस तरह की सूचना के बाद रवि के परिवार वालों ने सोमवार की शाम तीन बजे जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह से बात की।
डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली में यूपी के रेजिडेंट कमिश्नर को मेल भेजा व लेटर लिखा। डीएम ने रेजिडेंट कमिश्नर से सिफारिश की कि मुरादाबाद के पर्वतारोही रवि कुमार माउंट एवरेस्ट फतह कर लौटते वक्त माउंट एवरेस्ट पर लापता हो गए हैं।
लिहाजा नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास के जरिए रवि को तलाशने के लिए रेस्क्यू कराया जाए। देर शाम जिला प्रशासन की ओर से रवि के परिजनों को उनके निधन की सूचना दे दी गई। लेकिन रवि के पिता हरेकश सिंह और मां तारा देवी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि रवि की मौत हो चुकी है।