इस ढलती उम्र का प्रेम कहें या मजबूरी। सरकारी कर्मचारी उम्र के अंतिम पड़ाव पर दूल्हा बन रहे हैं। खास बात ये कि जिससे शादी हो रही वे उम्र में उनकी तुलना में आधी या एक तिहाई की हैं। सरकारी विभाग को उनकी शादी की सूचना पेंशन खाते दावेदार के नाम पर बदलवाने के लिए आवेदन के बाद पता चलती है। मुरादाबाद रेलवे मंडल में हर साल इस तरह से छह से आठ केस आते हैं।
जीवन में जब सब कुछ बेमानी लगता है और लोग अपने अंतिम दौर को आध्यात्म के शरण में जाकर गुजारने का मन बना लेेते हैं। उस उम्र में शादी करने वाले भी कम नहीं। जीवन संगिनी के साथ छोड़ने पर 70 साल या उससे अधिक उम्र में शादी करने वालों की संख्या बढ़ रही है। अच्छी खासी पेंशन होने के कारण उनकी शादियां भी आसानी से हो रही हैं।
पेंशन दिलाने के लिए होती हैं शादियां
मुरादाबाद। जिसके साथ जीवन गुजारा उसकी मौत से आई निराशा जीवन की दिशा बदल देती है। बच्चों के साथ नहीं देने पर रिटायर्ड कर्मचारी बड़ा फैसला कर लेते हैं। वे शादी करने के बाद वे डीआरएम कार्यालय में कार्मिक विभाग में अपने जीवन साथी का नाम बदलवाने के लिए आवेदन करते हैं। पेंशन खाते में नामिनी के तौर पर नई नवेली दुल्हन का नाम लिखवाते हैं। रेलवे के नियमानुसार जांच के बाद उसका नाम पेंशन खाते में जोड़ दिया जाता है। कई केस ऐसे भी आए हैं जिनमें
70 की उम्र में तलाक भी कम नहीं
मुरादाबाद। इस प्रकार के मामले में तलाक के केस भी कम नहीं। मुस्लिम समुदाय में चार शादियाें का नियम होने के कारण तलाक के बाद वे नई शादी करते हैं। अपने कागजों में तलाकनामा लगाकर नई शरीके हयात का नाम पेंशन के लिए दर्ज करते हैं।
रेलवे के नियमानुसार इन सभी को इस प्रकार की सुविधा होती है। पत्नी की मृत्यु होने या फिर तलाक होने पर दूसरी शादी को मान्यता दी जाती है और वह पेेंशन की हकदार होती हैं।
मोनिका सिंह, सीनियर डीपीओ