मुरादाबाद। कोरोना की दोहरी मार के बीच स्कूलों में फीस, किताबों, यूनिफार्म और अन्य मदों के नाम पर करीब 5.85 अरब का बाजार तैयार है। प्रशासन ने फीस और पाठ्यक्रम में बदलाव न करने की बात कही है। उसके बावजूद कुछ विद्यालयों ने पाठ्यक्रमों में बदलाव कर दिया है। अभिभावकों की ओर से शिकायत मिलने के बाद अब विद्यालय पाठ्यक्रम में बदलाव न करने की बात तो कह रहे हैं। लेकिन हकीकत इससे इतर है। एक ओर से अभिभावकों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया गया है तो स्कूलों ने उनकी जेब ढीली करवाने का दूसरा रास्ता निकाल लिया है।
मुरादाबाद जनपद में सीबीएसई, आईसीएसई और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में अध्ययनरत करीब ढाई लाख विद्यार्थियों पर एक साल में करीब 5.85 अरब रुपये से अधिक का खर्च अभिभावक करते हैं। इसमें करीब 1.75 अरब रुपये सिर्फ साल भर की फीस है। जबकि शेष रुपये यूनिफार्म, किताबों, आदि पर खर्च होते हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों को प्रमुखता दी जाती है। जिनका दाम एनसीईआरटी की किताबों के मुकाबले दस गुना तक है। यूनिफार्म और ट्रांसपोर्ट के नाम पर भी जेब पर बहुत बड़ा बोझ पड़ता है। स्कूलों में एक सत्र में ही सभी सीजन की करीब छह तरीके की यूनिफार्म होती हैं, उसमें नियमित यूनिफार्म के अलावा पीटी ड्रेस, स्पोर्ट्स ड्रेस, कोट-स्वेटर, ट्रैक सूट, दो तरह के जूते, जिसमें काले जूते और स्पोर्ट्स जूते शामिल हैं।
ऐसे समझें कारोबार का गणित
::: प्रमुख मदों पर प्रति वर्ष प्रति विद्यार्थी होने वाला औसत खर्च :::
1200 रुपये माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रति छात्र पाठ्यक्रम पर खर्च
1000 रुपये माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रति छात्र यूनिफार्म पर खर्च
5000 रुपये सीबीएसई, आईसीएसई के प्रति छात्र पाठ्यक्रम पर खर्च
1500 रुपये सीबीएसई, आईसीएसई के प्रति छात्र यूनिफार्म पर खर्च
1500 रुपये सीबीएसई, आईसीएसई के प्रति छात्र ट्रैक सूट पर खर्च
18000 रुपये सीबीएसई, आईसीएसई के प्रति छात्र परिवहन पर खर्च
2000 रुपये सभी बोर्डों में प्रति विद्यार्थी क्राफ्ट और अन्य गतिविधियों पर खर्च
1000 रुपये सीबीएसई, आईसीएसई के प्रति छात्र क्रीडा यूनिफार्म पर खर्च
1500 रुपये सभी बोर्डों के प्रति विद्यार्थी कोट, स्वेटर आदि पर खर्च
800 रुपये सभी बोर्डों में प्रति विद्यार्थी दो जोड़ी जूते पर खर्च
(प्रमुख मदों पर औसत खर्च विभिन्न दुकानदारों और अभिभावकों से बातचीत के आधार पर है।)
माध्यमिक बोर्ड के प्रति छात्र पर वार्षिक व्यय करीब 6500 रुपये
सीबीएसई, आईसीएसई के प्रति छात्र पर वार्षिक व्यय करीब 31300 रुपये
सभी बोर्डों के प्रति छात्र पर वार्षिक रूप से शुल्क पर व्यय 7000 रुपये
माध्यमिक बोर्ड में पढ़ने वाले डेढ़ लाख विद्यार्थियों पर करीब 975000000 रुपये वार्षिक खर्च
सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड के एक लाख विद्यार्थियों पर 3130000000 रुपये वार्षिक खर्च
सभी बोर्डों के ढाई लाख बच्चों का वार्षिक शुल्क करीब 1750000000 रुपये
बोर्ड स्कूल विद्यार्थी
सीबीएसई 62 95 हजार
आईसीएससी 07 7.5 हजार
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 415 1.5 लाख
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की वजह से किताबों की बिक्री थम गई है। नए सत्र में अभिभावक असमंजस में हैं कि पाठ्यक्रम खरीदें या नहीं। प्रकाशकों ने हमसे अनुबंध करवाया है कि किताब न बिकने की स्थिति में हम प्रकाशकों को किताबें वापस नहीं करेंगे। इसके कारण किताब विक्रेता परेशान हैं।
- संतोष किंगर, किताब विक्रेता
दोबारा से वही परिस्थितियां बन गईं, जो पिछले वर्ष थीं। इस वर्ष काम अच्छा होने की उम्मीद थी, लेकिन अब कुछ कहा नहीं जा सकता है। अभिभावकों का सोचना भी सही है, क्योंकि इन परिस्थितियों में बच्चों को स्कूल भेजना उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। उम्मीद है कि स्थितियां ठीक हों। बिजली का बिल, टैक्स, कर्मचारियों का वेतन आदि सभी देने पड़ रहे हैं, लेकिन आय नहीं है।
- अरविंद कुमार, यूनिफार्म विक्रेता
अभिभावक से जानकारी मिली है कि स्कूल संचालक अब किताबों को बदलने से इनकार कर रहे हैं। जनपदीय शुल्क नियामक समिति के सदस्यों से बात कर रहे हैं, ताकि एक-दो दिन में संबंधित स्कूलों की शिकायत अधिकारियों से की जा सके। स्कूलों की पहचान के लिए टाई और बेल्ट भले ही अलग हो जाएं, लेकिन सभी स्कूलों में एक ही रंग की यूनिफार्म होनी चाहिए, जिससे अभिभावकों की जेब पर बोझ कम होनी चाहिए।
- अनुज गुप्ता, संयोजक, मुरादाबाद पेरेंट्स ऑफ आल स्कूल्स
किताबों के बदलने का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। कोरोना संक्रमण काल की वजह से हमारे सामने स्कूल संचालन की चुनौती है। इसलिए हमने इस सत्र में जिलाधिकारी के आदेशों का पालन करते हुए किताबें या यूनिफार्म नहीं बदलने का फैसला लिया है। ज्यादातर स्कूलों में दो यूनिफार्म हैं, जिसमें एक यूनिफार्म पांच दिन और शनिवार के लिए सफेद यूनिफार्म है। सर्दियों में कोट-ब्लेजर जुड़ जाता है। पूरे वर्ष में करीब तीन यूनिफार्म ही रहती हैं। जहां तक शिक्षा के बाजारीकरण का सवाल है तो हम इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं।
- नीरज गुप्ता, महासचिव, मुरादाबाद एसोसिएशन आफ प्राइवेट स्कूल