जौहर ट्रस्ट मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सपा नेता आजम खां से रामपुर जेल में करीब आठ घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, चंदे के स्रोत, कथित फर्जी दानदाताओं, डमी ट्रस्टियों और जौहर यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्यों से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल किए गए। जांच एजेंसी ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और पहले पूछताछ किए गए लोगों के बयानों के आधार पर विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले की जांच कर रही ईडी मंगलवार की सुबह करीब नौ बजे जेल पहुंची, जहां चार सदस्यीय टीम ने सपा नेता से पूछताछ शुरू की। करीब आठ घंटे तक चली पूछताछ के बाद टीम शाम करीब 4.30 बजे जेल से बाहर निकली और फिर वापस लौट गई।
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान सपा नेता आजम खां के सामने सवालों की लंबी फेहरिस्त रखी गई। ईडी यह जानना चाहती है कि जौहर ट्रस्ट को अलग-अलग स्रोतों से कितनी धनराशि मिली। इस रकम का इस्तेमाल किन कार्यों में किया गया और ट्रस्ट के वित्तीय फैसले लेने में किन लोगों की क्या भूमिका रही। ट्रस्ट के खातों में दर्ज लेनदेन और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर भी जानकारी जुटाई गई।
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने कथित फर्जी दानदाताओं और डमी ट्रस्टियों से जुड़े सवाल भी किए। एजेंसी यह स्पष्ट करना चाहती है कि ट्रस्ट को धन देने वाले लोगों की पहचान और उनकी आर्थिक क्षमता से संबंधित रिकॉर्ड क्या हैं।
इसके साथ ही ट्रस्टियों की भूमिका, उनके अधिकारों और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है। जौहर यूनिवर्सिटी में हुए निर्माण कार्य भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल हैं। पूछताछ के दौरान सरकारी विभागों के बजट से कराए गए बताए जा रहे निर्माण कार्यों, उनके लिए धन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और संबंधित फैसलों में ट्रस्ट की भूमिका से जुड़े सवाल उठाए गए।
ईडी इन मामलों में दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर रही है। जांच एजेंसी का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल से संबंधित तथ्यों को स्पष्ट करना है। एजेंसी जौहर ट्रस्ट से जुड़े आजम खां के करीबी बताए जाने वाले ठेकेदारों और चमरौआ विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक नसीर अहमद खां से पहले ही पूछताछ कर चुकी है।
अब इन लोगों से मिली जानकारी और बयानों का आजम खां से पूछताछ के दौरान सत्यापन किए जाने की बात सामने आई है। जांच के अगले चरण में अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
फिलहाल जांच एजेंसी का जोर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, दानदाताओं की जानकारी, निर्माण कार्यों और संबंधित लोगों के बयानों के बीच समानता तथा अंतर की पड़ताल पर है। मामले में जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही आरोपों से संबंधित तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
चंदे के स्रोत और ट्रस्टियों की भूमिका पर फोकस
जौहर ट्रस्ट को मिलने वाले चंदे का स्रोत ईडी की जांच का अहम पहलू है। एजेंसी कथित फर्जी दानदाताओं और डमी ट्रस्टियों से जुड़े सवालों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट में धन कहां से आया और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया। वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों का मिलान कर लेनदेन की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
अब्दुल्ला आजम से पूछताछ की तैयारी
मामले की जांच के अगले चरण में अब्दुल्ला आजम से पूछताछ किए जाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तारीख या समन की पुष्टि नहीं हुई है। ईडी की आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन पर निर्भर करेगी।
मनी लॉन्ड्रिंग के तहत हो सकती है कार्रवाई
ईडी की यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं और कथित मनी लांड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच का हिस्सा है। कार्रवाई का एक प्रमुख केंद्र रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय रहा है। ईडी की टीमें संबंधित दस्तावेजों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकार्ड की पड़ताल कर रही हैं। बरामद दस्तावेजों की जांच-पड़ताल के बाद ईडी मनी लांड्रिंग के तहत आजम खा व उनके करीबियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करा सकती है।
494 करोड़ का भी हिसाब किताब पता कर रहा आयकर विभाग
आयकर विभाग ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से बैंक खातों के लेनदेन, संपत्तियों में निवेश और 11 फर्मों से मिले दान का साक्ष्यों सहित ब्योरा मांगा था। विभाग ने 21 और 24 जुलाई को दो नोटिस जारी किए थे।
इनमें वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक के वित्तीय रिकॉर्ड और दान की प्रामाणिकता साबित करने वाले दस्तावेज तलब किए गए थे। विभागीय मूल्यांकन रिपोर्ट में जौहर विश्वविद्यालय के 59 भवनों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने नोटिसों के जवाब दे दिए हैं, लेकिन विभाग की संतुष्टि और अंतिम निर्णय को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
क्या है मामला
आजम खां के जौहर ट्रस्ट और उसके द्वारा जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर करोड़ों के कालेधन को खपाने की शिकायत वर्ष 2019 में शहर विधायक आकाश सक्सेना ने की थी। जौहर विश्वविद्यालय की वित्तीय गतिविधियों और कथित अनियमितताओं से संबंधित जानकारी भी जांच एजेंसियों तक पहुंचाई थी। जांच एजेंसियों ने आकाश सक्सेना का नाम आजम खां, डॉ. तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम से जुड़े मामले में प्रथम शिकायतकर्ता के रूप में दर्ज किया था।
वर्ष 2022 में ईडी ने जौहर विश्वविद्यालय में छानबीन भी की थी। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। पिछले दिनों शहर विधायक ने ईडी से शिकायत करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में सपा नेता आजम खां के खिलाफ कालेधन को लेकर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी जिसमें आयकर विभाग ने आजम खां के खिलाफ 700 से 800 करोड़ की देनदारी निर्धारित की थी जिसमें संभवत: करीब 494 करोड़ का हिसाब किताब नहीं मिल पाया था।
इसके अतिरिक्त जौहर विश्वविद्यालय में स्थित 65.005 हेक्टेयर जमीन भी राज्य सरकार में निहित कर दी गई है, लेकिन यह मामला अब तक विचाराधीन है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग रखी थी, जिसके बाद ईडी और आयकर विभाग फिर सक्रिय हुई। तब से यह जांच चल रही है।
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तारीख
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ईडी की कार्रवाई
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2022
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ईडी की टीम जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों की प्रारंभिक पड़ताल के लिए रामपुर आई थी।
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19 अगस्त 2026
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रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां से जुड़े 10 ठिकानों पर छापेमारी।
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25 सितंबर 2026
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जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जहीरुद्दीन से करीब आठ घंटे पूछताछ।
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30 सितंबर 2026
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आजम खां के करीबी सालिम से पहली बार पूछताछ।
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5 अक्तूबर 2026
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आजम खां के चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गोयल से पूछताछ।
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6 अक्तूबर 2026
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सपा विधायक नसीर अहमद खां से करीब सात घंटे पूछताछ।
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8 अक्तूबर 2026
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सालिम से दूसरी बार करीब आठ घंटे पूछताछ।
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