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Moradabad News: मंडल में धरती की सेहत बिगड़ी...15000 खेतों में कम मिले जैविक कार्बन

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मुरादाबाद। फसलों की शक्ल में सोना उगलने वाली धरती की हालत अब खराब है। मिट्टी की जांच के 16 हजार नमूनों के परीक्षण में से 15 हजार में जरूरी पोषक तत्व कम मिले हैं। जानकार मान रहे हैं कि यही हालत रही तो फसलों की पैदावार घटेगी और भूमि के बंजर होने की नौबत भी आ सकती है।
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कृषि विभाग ने पिछले एक साल में मंडल में 16 हजार मिट्टी के नमूनों की जांच और विश्लेषण किया। इसमें खेती पर संकट के बादल नजर आए। मुरादाबाद मंडल की कृषि भूमि में नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक (जैविक) कार्बन जैसे पोषक तत्वों की भारी कमी होती जा रही है। मंडल के 160 गांवों से लिए गए 16 हजार नमूनों में से 15 हजार में मिट्टी की सेहत के लिए पोषक तत्व कम मिले हैं। यह परीक्षण अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच किया गया।
सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण एवं कल्चर) हर्षित कुमार चौहान ने बताया कि मिट्टी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए ऑर्गेनिक कार्बन बेहद आवश्यक है। नाइट्रोजन व ऑर्गेनिक कार्बन (मिट्टी का कालापन) की लगातार कमी से भूमि बंजर होने का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही फसलों की पैदावार घटना तय है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को दोबारा उपजाऊ बनाने में काफी वक्त लगेगा, बड़ी कवायद भी करनी होगी।
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सहायक निदेशक के अनुसार अंधाधुंध रासायनिक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग धरती की सेहत बिगड़ने का मुख्य कारण है। साथ ही ज्यादा जलदोहन भी भूमि की ताकत को कम कर रहा है। गोबर व हरी खाद से दूरी और फसल चक्र का क्रम बिगड़ना भी अहम कारण है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि किसानों को अभी से इसके लिए गंभीर होना चाहिए। सिर्फ गेहूं, धान व गन्ना जैसी मुनाफे वाली फसलों की ज्यादा पैदावार के फेर में फसल चक्र न बिगड़े, इसका ध्यान रखना होगा। वरना कृषि प्रधान देश में आने वाला समय खेती को ज्यादा खराब स्थिति तक पहुंचा देगा।


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किन तत्वों की मिली कमी

16000 नमूनों में से 10521 नमूनों में ऑर्गेनिक कार्बन, 15585 में नाइट्रोजन, 9543 बोरॉन, 2372 में जिंक, 1500 में फॉस्फोरस की कमी मिली है। दूसरी ओर 3052 नमूनों में फॉस्फोरस, 659 में पोटेशियम व 415 में ऑर्गेनिक कार्बन अधिक होने के संतोषजनक नतीजे भी मिले हैं।


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जरूरी उपाय

गोबर की खाद और हरी खाद में नाइट्रोजन फिक्सेशन राइजोरियम बैक्टीरिया (जीवाणु) होता है, जो मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करता है। हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी को उपजाऊ बनाता है। गोबर की खाद से जीवांश कार्बन की पूर्ति होती है। इसके अलावा सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति के लिए 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से जिंक सल्फेट, बोरिक एसिड का प्रयोग भी किया जाना आवश्यक है। फसल चक्र को अपनाना बेहद आवश्यक है।

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प्रति हेक्टेयर ऑर्गेनिक कार्बन 0.5 से 0.75 प्रतिशत होनी चाहिए

सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण) के अनुसार स्वस्थ मिट्टी में प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन 280 से 560 किलो होनी चाहिए लेकिन अधिकतर नमूनों में इसकी मात्रा 120 से 240 किलो प्रति हेक्टेयर रह गई है। प्रति हेक्टेयर ऑर्गेनिक कार्बन 0.5 से 0.75 प्रतिशत होना चाहिए, जो 0.25 से 0.35 फीसदी है। फॉस्फोरस की मात्रा 10 से 25 किग्रा होनी चाहिए, जो 15 से 30 किलो तक सिमट गया है। पोटेशियम 120 से 280 किग्रा के स्थान पर 150 से 250, पोटेशियम ऑफ हाइड्रोजन (पीएच) 5.5 से 8.5 के बजाय 6.5 से 7.5, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी 1.0 से कम हो। कुछ नमूनों में सूक्ष्म तत्वों जैसे जिंक, बोरॉन आदि की भी 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी देखने को मिली है।
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