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रामगंगा में ई-कचरा फेंकने वाले अनेक, रोकने वाला एक नहीं

Fri, 05 May 2017 02:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा रामगंगा में ई-कचरा फेंके जाने पर एक लाख रुपया जुर्माना लगाए जाने के आदेश के बाद भी रामगंगा में ई-कचरा जलाने और धोने का काम धड़ल्ले से चलता रहा।
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आदेश के पहले दिन भी जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन की ओर से ई-कचरा जलाने और धोने के चिन्हित रोने वाला एक अफसर या कर्मचारी नहीं दिखाई पड़ा, जबकि नियम तोड़ने वाले अनकों दिखाई दिए। हमेशा की तरह तड़के तड़के भट्टियां जलीं और फिर पूरे दिन ई-कचरा छनता और गंगा में फिंकता रहा।

लालबाल काली मंदिर के पास सालों से पीतल के वेस्ट माल से फिर से पीतल निकालने के लिए उसकी पिसाई का काम होता रहा है। यहां बाकायदा एक मशीन लगाई गई है जो पीतल के वेस्ट माल को पीसने का काम करती है। इसके बाद उस पिसे हुए माल को रामगंगा में धोया जाता है।
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लेकिन पीतल पीसने की आड़ में यहां ई- कचरा को पीसने और उसे छानने का काम होता रहा है। जब भी कोई प्रशासनिक अधिकारी या कर्मचारी यहां ई-कचरा से संबंधित जानकारी लेने आते हैं तो उन्हें पीतल का हवाला देकर बहला-फुसला दिया जाता है।

जबकि यहां पीतल की वेस्ट मिट्टी और ई- कचरा के पिसे माल को छानने के लिए हौज बनाए गए हैं। हौज बनाने के पीछे कारोबारी तर्क देते हैं कि वह रामगंगा को मैला नहीं कर रहे हैं। हौज का पानी हौज में ही सूख जाता है। जबकि हकीकत यह है कि यह पानी अंत में नदी में ही छोड़ा जाता है।

पीतल भट्टियों को सीज करने के बाद भी यहां पिसाई के लिए छोटे ट्रकों में आए वेस्ट माल को देखकर कहा जा सकता है कि यह पीतल का वेस्ट माल नहीं बल्कि ई-कचरा है। इसे पीसकर यहां नदी किनारे हौज में धोया और छाना जाता है।

एसएसपी मनोज तिवारी ने बताया कि सभी थानाध्यक्ष और सीओ को आदेश दिए गए हैं कि कहीं भी ई-कचरा नहीं जलना चाहिए। ई-कचरा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।
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