मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण काल में सरकारी अस्पतालों की ओपीडी भले ही बंद हो, लेकिन मरीजों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। मरीज घर बैठकर ही ई-संजीवनी ओपीडी के जरिए डाक्टरी सलाह ले सकते हैं। जिला अस्पताल में ई-संजीवनी ओपीडी में दो विशेषज्ञ समेत चार डाक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जो वर्चुअल मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श देते हैं।
कोरोना संक्रमण काल मरीजों की सुविधा के लिए केंद्र सरकार ने ई-संजीवनी ओपीडी सेवा शुरू की है। इसका मकसद जिला अस्पताल की ओपीडी में होने मरीजाें की भीड़ कम करना और मरीजों को संक्रमण से बचना है। ये सेवा अक्तूबर 2020 से चल रही है। जिला अस्पताल में दो विशेषज्ञ और दो एमबीबीएस डाक्टर तैनात किए गए हैं। जो ई-संजीवनी ओपीडी में मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श देते हैं। अभी तक ये डाक्टर करीब 45 हजार मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दे चुके हैं। ई-संजीवनी ओपीडी के मैनेजर कुलदीप सक्सेना ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा बंद होने पर ई संजीवनी ओपीडी मरीजों के फायदेमंद साबित हो रही है। ई संजीवनी ओपीडी में रजिस्ट्रेशन कराकर अपना इलाज करा सकते हैं।
ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
- मरीज को अपने मोबाइल पर ई-संजीवनी एप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद मरीज को ई-संजीवनी ओपीडी में अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। मरीज को अपनी बीमारी के बारे में लिखना होगा। इसके बाद संबंधित डाक्टर मरीज को ऑनलाइन लाइव देखकर चिकित्सकीय परामर्श देगा।
सुबह आठ से शाम पांच बजे तक ई संजीवनी ओपीडी
- ई संजीवनी ओपीडी नौ घंटे चलती है। सुबह आठ बजे से शाम पंाच बजे तक मरीज चिकित्सकीय परामर्श ले सकते हैं।
गांव के मरीजों के लिए सीएचओ
मुरादाबाद। ग्रामीण इलाके मरीज जिनके पास एंड्रायड मोबाइल नहीं है, उनकी मदद के लिए सब सेंटरों पर सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ आफिसर) तैनात किए गए हैं। मरीज इनके पास जाकर अपनी बीमारी की जानकारी देंगे। इसके बाद सीएचओ इन मरीजों को इ-संजीवनी ओपीडी से जोड़ देते हैं।
- ई-संजीवनी ओपीडी में मरीज वर्चुअली आमने-सामने अपनी परेशानी बताते हैं या फिर ऑनलाइन चैट के जरिए बीमारी बताते हैं।
- डा. रशि मौर्या, ई संजीवनी ओपीडी
- सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद होने पर मरीज ई-संजीवनी ओपीडी के जरिए चिकित्सकीय परामर्श ले रहे हैं। साधारण बीमारियों से लेकर गंभीर बीमारियों तक पर राय ली जा रही है।
- डा. अमरेंद्र प्रताप सिंह, ई-संजीवनी ओपीडी