रेलवे स्टेशन पर 10 लाख रुपये की लागत से लगाए गए वाईफाई सिस्टम को 10 उपयोगकर्ता भी नहीं मिल रहे हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 में रेलटेल नेटवर्क के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह सेवा अब रेल यात्रियों को बिल्कुल नहीं लुभाती। इसका कारण वाईफाई की लो स्पीड और विभिन्न टेलीकॉम कंपनियां द्वारा दिया जाने वाला सस्ता डाटा है। ऐसे में मुरादाबाद जंक्शन पर लगे वाईफाई के छह सेटअप उपेक्षित स्थिति में हैं।
22 मार्च 2020 से जुलाई 2021 तक यात्रियों की संख्या कम होने का कारण रेलवे ने इसे बंद रखा था। जुलाई में इसे शुरू किया गया लेकिन लोगों की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। रेलवे के सिग्नल एवं दूर संचार विभाग के अनुसार जब रेलवे स्टेशन पर इस सिस्टम की शुरूआत हुई थी तो लोगों ने बहुत अच्छी प्रतिक्रिया दी थी। मोबाइल डाटा महंगा होने के कारण रेलयात्री, शहरी युवा भी स्टेशन पर मुफ्त वाईफाई का आनंद लेते नजर आते थे। अब स्थिति बिल्कुल बदल गई है। दिसंबर माह में एक व्यक्ति ने भी रेलवे स्टेशन पर लगे वाईफाई का उपयोग नहीं किया।
रेलवे के वाईफाई को मिल रही उपेक्षा का एक कारण इसकी जटिल प्रक्रिया भी है। वाईफाई कनेक्शन को प्रारंभ करने के लिए यात्रियों को वाई-फाई विकल्पों को स्कैन कर रेलवायर ऑप्शन चुनना होता है। यह ब्राउजर उपयोगकर्ता को रेलवायर पोर्टल पर ले जाता है। मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड होगा, जिस पर वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आएगा। एक बार कनेक्ट होने के बाद 30 मिनट तक इंटरनेट चलता है। इससे रेल यात्रियों को रेलवे की जानकारी से जुड़े रहने और अपडेट रहने में मदद मिलती है। 30 मिनट के बाद वाईफाई डिस्कनेक्ट हो जाता है। रेलवे द्वारा उपलब्ध वाई-फाई की स्पीड बढ़ाने के लिए उपयोगकर्ता को कुछ शुल्क देना होता है। इस सब से हटके उपयोगकर्ता सस्ते और आसान मोबाइल डाटा को इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं नगर के रोडवेज बस अड्डों पर भी यही स्थिति है। बस अड्डों पर वाईफाई सेटअप नगर निगम द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगाया गया है। रोडवेज प्रबंधन के मुताबिक सिस्टम को कोई उपयोग नहीं कर रहा है। इससे पहले बस अड्डों पर जो वाईफाई लगा हुआ था, वह भी कार्यालय के उपयोग में लिया जा रहा था।