बिलारी। अमरपुरकाशी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथाव्यास आचार्य ओमकृष्ण शास्त्री ने कहा कि दूसरों का हित करना ही सर्वोत्तम धर्म है। उन्होंने कहा कि जो बात अपने लिए बुरी लगती हो वह कभी दूसरे के लिए मत कहो, यही सबसे बड़ा धर्म है और दूसरों को पीड़ा पहुंचाना सबसे बड़ा अपराध है। कथाव्यास ने अजामिल का चरित्र बताते हुए कहा कि अजामिल अपने पुत्र का नाम नारायण रख लेने से भगवान की शरण में चला गया। कथाव्यास ने आगे कहा कि वामन भगवान ने राजा बलि का सब कुछ लेते हुए भी उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। प्रसंग के अंत में कथाव्यास ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा का प्रसंग सुनाया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के नाम के जयकारे लगाए। मौके पर जयमान मेघराज सैनी, सुशीला देवी, खंदारी सिंह यादव रहे। इस अवसर पर राजेश दिवाकर, अशोक यादव, विनोद सैनी, आकाश शर्मा, कुलदीप सैनी, राजकुमार यादव, महेंद्र सैनी, सुरेंद्र सिंह, नेत्रपाल सैनी व विजय यादव आदि रहे। संवाद