मुरादाबाद। युवा ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख ने फिडे महिला शतरंज विश्व कप-2025 जीतकर जब इतिहास रचा तो इसकी गूंज सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ही नहीं बल्कि मुरादाबाद की गलियों तक सुनाई दी। इस जीत ने खासकर शहर की बेटियों में आत्मविश्वास भरने का काम किया है। जो अब शतरंज को सिर्फ शौक नहीं बल्कि करियर की दिशा मानकर मेहनत में जुट गई हैं।
शहर में इस समय करीब 350 से अधिक लड़कियां अलग-अलग स्तर पर शतरंज खेल रही हैं। ये खिलाड़ी या तो स्कूल के माध्यम से या यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म या फिर परिजनों की मदद से इस खेल को सीख रही हैं। शहर की कई लड़कियां ने राज्य स्तर तक की प्रतियोगिता में नायाब प्रदर्शन कर मेडल भी अपने नाम किया है। सारा अजीम, अलिश्बा आजम, इनाया आजम, सनमीत कौर, सारा ढल और अद्वैता गौतम जैसी खिलाड़ियों ने राज्य स्तर तक की प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर मेडल अपने नाम किया है।
इन खिलाड़ियों के लिए दिव्या देशमुख की ऐतिहासिक जीत किसी प्रेरक दस्तावेज से कम नहीं है। इन खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देने के लिए जिला शतरंज स्पोर्ट्स एसोसिएशन की ओर से भी पहल की गई है। एसोसिएशन की ओर से शहर के सिविल लाइंस इलाके में शतरंज की बारीकियों को सिखाने के लिए एक एकेडमी खोली गई है। यहां फिडे रेटेड खिलाड़ी अरसम जावेद खिलाड़ियों को विश्लेषणात्मक तकनीक, मानसिक प्रशिक्षण और साफ्टवेयर के जरिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दे रहे हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रकांत सरन और सचिव प्रमोद बिष्ट का कहना है कि लड़कियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। हर साल शहर में दो से तीन बार जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं होती हैं जिनमें ये लड़कियां अपना दमखम दिखाती हैं। शहर में अगले दो से तीन महीने में एक बड़ी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी जिसके विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिलेगा। वहीं फिडे रेटेड अन्य कोचों का भी दावा है कि शहर से आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व देखने को मिलेगा।